अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच लंबे समय से तनातनी चली आ रही थी.
नई दिल्ली:
- डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच मतभेद और दूरी की सबसे बड़ी वजह उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम था. अमेरिका समेत तमाम देश उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे. उनकी मांग थी कि उत्तर कोरिया अपने परीक्षण ठिकानों और परमाणु हथियारों को नष्ट करे.
- उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण अभियानों को देखते हुए विदेशों में उत्तर कोरिया का बैंक खाता खोलने पर रोक लगा दी गई थी. संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने हर वित्तीय संस्थान पर प्योंग्यांग के लिए लेन देन करने पर भी रोक लगाई. उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों के पीछे अमेरिका की बड़ी भूमिका मानी जा रही थी.
- अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर और तमाम प्रतिबंध लगा दिये थे. मसलन अमेरिका ने अपने नागरिकों को एयर कोरयो के साथ किसी भी तरह के कानूनी कारोबार पर रोक लगाई थी. उत्तर कोरिया की सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर कोरयो सिर्फ चीन और रूस के लिए उड़ान भरती है.
- अमेरिका समेत तमाम देशों के विरोध के बावजूद उत्तर कोरिया तानाशाह किम जोंग उन के नेतृत्व में एक के बाद एक परमाणु परीक्षण करता रहा. यहां तक कि उसने अमेरिका समेत तमाम देशों को धमकी भी दी. कहा कि अमेरिका और अन्य देश उसकी मिसाइल और अन्य हथियारों के जद में हैं.
- अमेरिका से तनातनी के पीछे एक वजह उत्तर कोरिया की चीन से नजदीकी भी मानी जा रही थी. अक्सर तमाम मोर्चे पर उत्तर कोरिया चीन के पाले में खड़ा नजर आता. यहां तक कि पिछले दिनों किम जोंग उन ने चीन की एक सिक्रेट यात्रा भी की. जिसने आग में घी डालने का काम किया था.
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