Hindu Temple Bell Significance: हिंदू धर्म में ईश्वर की साधना के लिए के कई चीजों का प्रयोग किया जाता है. जब कभी भी आप किसी देवालय में प्रवेश करते हैं तो आप आपको उसके मुख्य द्वार पर लगा हुआ घंटा सबसे पहले दिखाई देता है. जिसे बजाए जाने पर उसकी ध्वनि बहुत दूर तक जाती है. मान्यता है कि घंटे की लयबद्ध आवाज अक्सर लोगों को मंत्रमुग्ध करते हुए उन्हें धर्म और अध्यात्म के भाव को जगाने का काम करती है. हिंदू मान्यता है कि मंदिर में प्रवेश करते समय घंटा बजाने से आस्थावान व्यक्ति की देवताओं के समक्ष हाजिरी लग जाती है. जिस घंटे की ध्वनि से आस्थावान लोगों को दैवीय अनुभूति होती है, आइए उसका धार्मिक महत्व विस्तार से जानते हैं.
घंटा बजाने के पीछे धार्मिक कारण

हिंदू मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान देवालयों में घंटा बजाने से उस मंदिर के प्रधान देवता से लेकर स्थान देवता तक सभी जाग्रत अवस्था में आ जाते हैं. जिन मंदिरों में प्रतिदिन पूजा के दौरान घंटा-घड़ियाल बजता है, उसे जाग्रत देव स्थान माना जाता है. इसी प्रकार पूजा में बजाए जाने वाली घंटे की ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक का वायुमंडल पवित्र हो जाता है.
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घंटा बजाने के पीछे आध्यात्मिक कारण
हिंदू मान्यता के अनुसार देवालयों फिर कहें मंदिर में देवी-देवताओं की स्तुति और प्रार्थना करते समय घंटा आदि बजाने के पीछे न सिर्फ धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक कारण भी हैं. घंटे को बजाने से जो लयबद्ध तरंगे पैदा होती हैं, वह व्यक्ति को आध्यात्मिक एवं मानसिक सुकून प्रदान करती हैं.
घंटा बजाने के पीछे सामाजिक कारण

मंदिरों या फिर घर आदि पर घंटी या घंटा-घड़ियाल बजाने के पीछे सामाजिक कारण है. देवतागण की आरती करते समय जब घंटी आदि की ध्वनि होती है तो वह आस्थावान लोगों को धार्मिक कार्यों के प्रेरित करते हुए पूजा के समय का भान कराती है. जिसे सुनते ही लोग खुद उस पूजा स्थल की ओर खिंचे चले आते हैं.
घर की पूजा मे बजाई जाती है गरुण घंटी
किसी भी पूजा में चार प्रकार से नाद किया जाता है. इसके लिए व्यक्ति गरुण घंटी, द्वार घंटी, हाथ घंटी और विशाल घंटे का उपयोग करता है. जिस प्रकार मंदिरों में घंटा बजाया जाता है, कुछ उसी तरह सामान्य घरों में पूजा के दौरान गरुण घंटी का प्रयोग होता है. इस घंटी के ठीक उपर गरुण बना होता है. हिंदू मान्यता है कि घंटी पर बना हुआ गरुण पक्षी आपकी प्रार्थना को जगत के पालनहार यानि विष्णु भगवान तक पहुंचाने का माध्यम बनता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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