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कटनी का चमत्कारी मां जालपा मंदिर, जहां 64 योगिनियों के साथ विराजती हैं माता, जानें महत्व और इतिहास

नवरात्र के समय में भारी संख्या में भक्त माता रानी के मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मध्य प्रदेश के कटनी शहर के बीचों-बीच मां जालपा देवी मंदिर में माता 64 योगिनियों के साथ विराजती हैं.

कटनी का चमत्कारी मां जालपा मंदिर, जहां 64 योगिनियों के साथ विराजती हैं माता, जानें महत्व और इतिहास
मां जालपा मंदिर

हिंदू धर्म में नवरात्रि का खास महत्व है. इन 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के हर दिन मां दुर्गा के एक विशेष रूप की आराधना की जाती है. इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर यानी रविवार को हो चुकी है. नवरात्र के समय में भारी संख्या में भक्त माता रानी के मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मध्य प्रदेश के कटनी शहर के बीचों-बीच विराजमान मां जालपा देवी का मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. नवरात्र में यहां अपार संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते है.

200 साल पुराना मंदिर

मंदिर के पुजारी लालजी पंडा ने बताया कि यह मंदिर लगभग 200 साल पुराना है. यहां मां जालपा देवी की मूर्ति स्थापित है. उन्होंने कहा, "पहले यहां जंगल हुआ करता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां लगातार विस्तार होता जा रहा है और मंदिर का निर्माण होता जा रहा है". उन्होंने कहा कि कटनी के इस मंदिर में मां जालपा, मां कालका और मां शारदा समेत कुल 64 योगिनियां स्थापित हैं. यहां आसपास के इलाकों से लोग आते हैं और भक्तिमय वातावरण रहता है. शाम की आरती के समय यहां बहुत अच्छा लगता है. मान्यता है कि यहां मां स्वयं शिला के रूप में प्रकट हुई थीं. जहां नवरात्र के दौरान भक्तों का सैलाब उमड़ता है.

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, करीब 250 वर्ष पहले रीवा जिले के एक छोटे से गांव से बिहारी लाल पंडा अचानक कटनी आ पहुंचे थे. उस समय आज के जालपा वार्ड में दूर-दूर तक बांस का घना जंगल हुआ करता था. मान्यता है कि मां जालपा देवी ने उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित किया था. इसके बाद जब उन्होंने जंगल में वर्तमान मंदिर स्थल की सफाई शुरू की, तो वहां एक शिला के रूप में मां जालपा की प्रतिमा मिली.

इसके बाद विधि-विधान से प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई और एक छोटी-सी मढ़िया में मां को विराजमान किया गया. करीब 50 साल पहले मंदिर समिति ने जयपुर से मां जालपा, मां कालका और मां शारदा की प्रतिमाएं लाकर स्थापित कराईं. साथ ही यहां 64 योगिनियों की स्थापना भी की गई. आज नवरात्र ही नहीं, बल्कि पूरे साल भक्त मां के दर्शन करने पहुंचते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

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