पश्चिम बंगाल में इस समय 10वीं बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं. ये परीक्षाएं 2 फरवरी से शुरू हुई हैं, जो कि 12 फरवरी तक चलेंगी. इस बीच ही एक स्कूल की लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है. जिसने सबको हैरान कर दिया. स्कूल की लापरवाही के कारण एक बच्चे को उसका Amit Card नहीं मिल पाया. ये मामला कलकत्ता हाई कोर्ट भी पहुंचा, जहां इसकी सुनवाई की गई. 29 जनवरी को जस्टिस अमृता सिन्हा ने भवानीपुर के एक जाने-माने स्कूल की लापरवाही पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने स्कूल अथॉरिटी पर 10,000 रुपये का फाइन भी लगाया. कोर्ट ने वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन को भी स्टूडेंट के सेकेंडरी एग्जाम में बैठने के लिए इंतजाम करने का निर्देश दिया.
जज ने निर्देश दिया कि सेकेंडरी स्कूल के स्टूडेंट अयान दास को शुक्रवार शाम तक एनरोलमेंट देना होगा. वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन को अर्जेंट बेसिस पर एडमिट कार्ड देना होगा. हाई कोर्ट ने सेकेंडरी बोर्ड को स्टूडेंट का नाम रजिस्टर करने का निर्देश दिया था. जस्टिस अमृता सिन्हा ने यह भी आदेश दिया है कि भवानीपुर स्कूल के उस ऑफिसर के खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन शुरू किया जाए जिसकी लापरवाही की वजह से स्टूडेंट को उसका एडमिट कार्ड नहीं मिला.
क्या है पूरा मामला
कलकत्ता हाई कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, स्कूल में एक ही नाम के दो स्टूडेंट थे. अयान दास नाम का एक और स्टूडेंट सेकेंडरी एग्जाम में बैठने के लिए ज़रूरी टेस्ट में फेल हो गया था. लेकिन, स्कूल ने उसका नाम वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन को भेज दिया. बोर्ड ने फिर उसके नाम से एडमिट कार्ड जारी कर दिया. लेकिन स्कूल अधिकारियों ने एलिजिबल अयान दास, जिसने टेस्ट एग्जाम पास कर लिया था, का नाम रजिस्ट्रेशन के लिए बोर्ड को नहीं भेजा. नतीजतन, एग्जाम की तारीख पास आने पर भी, एलिजिबल अयान को उसका एडमिट कार्ड नहीं मिला. इस स्थिति में, उसके अभिभावकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
कोर्ट में बहस के दौरान स्कूल के वकील ने स्कूल की लापरवाही मानी. उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही स्कूल को गलती का एहसास हुआ, उसके प्रतिनिधियों ने तुरंत वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन से गलती ठीक करने के लिए संपर्क किया. लेकिन, बोर्ड ने आखिरी समय में अपने ऑनलाइन पोर्टल पर गलती ठीक करने से इनकार कर दिया.
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस अमृता सिन्हा ने आदेश दिया कि स्कूल की लापरवाही के कारण किसी स्टूडेंट का साल इस तरह बर्बाद नहीं किया जा सकता. अगर स्कूल की गलती के कारण कोई परीक्षा में बैठने के मौके से वंचित रह जाता है, तो यह उनके साथ अन्याय होगा.
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