NEET पेपर लीक के बाद परीक्षा को रद्द करना पड़ा था और 22 लाख से ज्यादा छात्रों पर सीधा इसका असर हुआ. इसके बाद जब 21 जून को री-नीट यानी दोबारा नीट का पेपर हुआ तो सबसे पहले सरकार ने टेलीग्राम को बैन कर दिया, जहां पेपर लीक के सबसे ज्यादा दावे किए जाते हैं. टेलीग्राम का नाम कई तरह के पेपर लीक के मामलों से जुड़ा, जहां कुछ लोगों ने एग्जाम से पहले ही पेपर के कुछ सैंपल डाले और लोगों से जमकर वसूली की. अब इसे लेकर Athenian Tech की तरफ से एक 'थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट' जारी की गई है. इसमें टेलीग्राम और डार्क वेब पर चल रहे परीक्षा पेपर लीक और धोखाधड़ी के नेटवर्क का पूरा एनालिसिस किया गया है.
टेलीग्राम पर शुरू हो चुका था खेल
रिपोर्ट में बताया गया है कि नीट के दूसरे पेपर से पहले ही सरकार को पता चला कि टेलीग्राम पर PAPER LEAKED NEET जैसे चैनलों के जरिए छात्रों से भारी रकम लेकर नकली या लीक पेपर बेचे जा रहे थे. इसके बाद 16 जून 2026 को सरकार ने आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके 22 जून तक पूरे देश में टेलीग्राम ऐप पर अस्थायी रोक लगा दी. सरकार का कहना था कि सिर्फ चैनलों को बंद करना काफी नहीं था, क्योंकि धोखाधड़ी करने वाले तुरंत नए ग्रुप और बॉट्स बना लेते थे.
टेलीग्राम ने इस बैन को दिल्ली हाईकोर्ट में चैलेंज किया, लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार के सबूतों को देखते हुए इस रोक को सही ठहराया. इस दौरान सरकार ने टेलीग्राम को नया डार्क वेब तक कह दिया.
कैसे काम करता है पूरा नेटवर्क?
'थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट' में ये भी बताया गया है कि धोखाधड़ी का पूरा नेटवर्क काम कैसे करता है. ये नेटवर्क कुल तीन स्टेप्स में काम करता है.
- सबसे पहले परीक्षा से जुड़े नामों का इस्तेमाल करके टेलीग्राम पर पब्लिक चैनल बनाए जाते हैं, जिससे छात्र या अभ्यर्थी उनसे जुड़ते जाते हैं.
- दूसरा स्टेप छात्रों का भरोसा जीतना होता है. इसके लिए उन्हें सैंपल पेपर्स, अच्छे नोट्स और बाकी तरह के स्टडी मटीरियल दिए जाते हैं.
- इसके बाद तीसरा और आखिरी स्टेप छात्रों में डर पैदा करना और जल्दबाजी मचाना होता है. पेपर से ठीक पहले दावा किया जाता है कि जो सैंपल पेपर हमारे पास है, उससे ज्यादातर सवाल पूछे जाएंगे. इसके बाद सीधे पैसों की डिमांड होने लगती है. कई बार पेपर के लिए 50 हजार से 1 लाख तक भी मांग लिए जाते हैं.
बोर्ड एग्जाम्स के लिए भी खूब डिमांड
रिपोर्ट में बताया गया है कि बोर्ड परीक्षाओं के लिए भी टेलीग्राम पर 500 से लेकर 15 हजार का रेट तय होता है. पेमेंट होने के बाद छात्रों को एक प्राइवेट ग्रुप में जोड़ा जाता है और वहीं सवाल दिए जाते हैं. भले ही क्वेश्चन पेपर सही ना हों, लेकिन पैनिक और डर के चलते छात्र आसानी से यकीन कर लेते हैं और धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं.
इन एग्जाम्स को भी किया गया टारगेट
- UPSC CSE (सिविल सेवा परीक्षा)
- SSC CGL (कर्मचारी चयन आयोग)
- NDA (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी)
- IBPS PO (बैंकिंग परीक्षा)
- SSLC (कर्नाटक और अन्य राज्यों के राज्य बोर्ड)
डार्क वेब पर भी चल रहा है धंधा
टेलीग्राम के अलावा काली दुनिया यानी डार्क वेब पर भी ऐसी ही चीजें देखी गईं. यहां 'इंडिया एग्जाम पेपर्स हब' नाम से मार्केटप्लेस मिला, जहां UPSC, SSC CGL, NDA और IBPS जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर्स $60 से $500 में बेचे जा रहे थे. यहां भुगतान के लिए सिर्फ बिटकॉइन का इस्तेमाल होता था. रिपोर्ट में इसे एक बड़ा खतरा बताया गया है, क्योंकि इससे परीक्षाओं की पवित्रता और ईमानदारी खत्म होती है.
सरकार ने क्या कदम उठाए?
जून 2026 में बिहार पुलिस ने छात्रों को टेलीग्राम के झांसे में न आने की चेतावनी दी थी. इसके अलावा 21 जून को हुई री-नीट परीक्षा में बायोमेट्रिक, फेशियल रिकग्निशन और CCTV जैसी कड़ी सुरक्षा का इस्तेमाल किया गया. साथ ही महाराष्ट्र में छापेमारी के दौरान TET परीक्षा के पेपर मिलने के बाद 28 जून 2026 को होने वाली परीक्षा को पोस्टपोन कर दिया गया.
रिपोर्ट में दिए गए सुझाव
इस रिपोर्ट में कुछ सुझाव भी दिए गए हैं. जिनमें कहा गया है कि छात्र या अधिकारी किसी भी संदिग्ध टेलीग्राम चैनल या डार्क वेब लिंक का स्क्रीनशॉट लेकर तुरंत पुलिस और परीक्षा एजेंसियों को रिपोर्ट करें. किसी भी हाल में पैसों का लेन-देन न करें. जब भी परीक्षा की तारीख नजदीक आए तो सोशल मीडिया और डार्क वेब की लगातार निगरानी की जाए. पेपर्स पर खास 'वॉटरमार्क' लगाए जाएं, जिससे लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि पेपर कहां से बाहर आया है.
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