CBSE Three-Language Policy: थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को नोटिस जारी किया है. कक्षा 9 के छात्रों के लिए CBSE की तीन-भाषा नीति से जुड़े सर्कुलरों को चुनौती दी गई थी, जिसके बाद ये नोटिस जारी हुआ है. कोर्ट ने CBSE को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकीलों ने इस पॉलिसी को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए. जिसमें कहा गया कि देश में फिलहाल इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है.
वकीलों ने उठाए सवाल
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि नई व्यवस्था को लागू करने में कई व्यावहारिक दिक्कतें हैं. 22 निर्धारित भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल 3 भाषाओं की किताबें उपलब्ध हैं और अधिकांश स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक भी नहीं हैं. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजी को नॉन नेटिव भाषा मानने से छात्रों के सामने अंग्रेजी या किसी विदेशी भाषा की जगह भारतीय भाषा चुनने का दबाव बन सकता है.
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इस दौरान वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने दलील दी कि CBSE के सर्कुलर कानून के अनुरूप नहीं हैं और छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर कोई छात्र संस्कृत के बजाय पंजाबी पढ़ना चाहता है, तो उसके लिए न तो शिक्षक उपलब्ध हैं और न ही किताबें.
वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने भी कहा कि देश के अधिकांश स्कूलों में इतनी बड़ी संख्या में भारतीय भाषाओं के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. इस दौरान वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि इस नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना था, ऐसे में इसे जल्दबाजी में लागू करने का औचित्य क्या है.
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने 'नेटिव लैंग्वेज' शब्द पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस शब्द की व्याख्या स्पष्ट नहीं है. उन्होंने टिप्पणी की कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने का उद्देश्य स्पष्ट है, लेकिन 'नेटिव' शब्दावली पर पुनर्विचार की आवश्यकता हो सकती है. साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या अंग्रेजी को भारतीय नेटिव लैंग्वेज माना जा सकता है.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस पॉलिसी पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है और न ही इसे लागू करने पर रोक लगाई है. अदालत ने केवल CBSE से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की है.
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