CBSE Three-Language Policy: थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर मचे बवाल के बाद CBSE की तरफ से इसमें कई बदलाव किए गए थे. इसमें बताया गया था कि 10वीं बोर्ड परीक्षा में आने वाले साल में तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी, इसके अलावा बाकी तमाम नियमों के बारे में बताया गया. अब बोर्ड की तरफ से कुछ नए सवालों के जवाब भी दिए गए हैं, जिसमें ये बताया गया है कि अगर कोई 9वीं का छात्र तीसरी भाषा की परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसे कैसे 10वीं में एडमिशन मिलेगा और थर्ड लैंग्वेज में पास होना जरूरी होगा या फिर नहीं.
10वीं में नहीं देनी होगी तीसरी भाषा की परीक्षा
CBSE की तरफ से जारी एक FAQ में बताया गया है कि कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीसरी भाषा (R3) की परीक्षा और मूल्यांकन इंटरनल असेसटमेंट के जरिए होगा. यानी स्कूल के टीचर्स ही मूल्यांकन करेंगे. इसके बाद जब ये बैच 10वीं (सत्र 2027-28) में जाएगा तो उन्हें तीसरी भाषा के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी. हालांकि तीसरी भाषा में पास होना जरूरी है.
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फेल होने वाले छात्रों का क्या होगा?
बोर्ड की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि सीबीएसई पास सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए छात्र को कक्षा 10वीं में स्कूल स्तर के इस मूल्यांकन में पास होना अनिवार्य है. अगर कोई छात्र कक्षा 9वीं में तीसरी भाषा (R3) में फेल हो जाता है, तो छात्र को कक्षा 10वीं में प्रमोट कर दिया जाएगा. हालांकि, छात्र को कक्षा 10वीं की पढ़ाई के दौरान ही कक्षा 9वीं की तीसरी भाषा की परीक्षा को पास करना होगा. अगर कोई छात्र कक्षा 10वीं में तीसरी भाषा में पास नहीं हो पाता है, तो रिजल्ट घोषित होने से पहले स्कूल की तरफ से उसकी दोबारा परीक्षा ली जाएगी.
7वीं और 8वीं के छात्रों के लिए क्या नियम हैं?
जब ये छात्र आगे चलकर कक्षा 9वीं और 10वीं में पहुंचेंगे, तब इन्हें भी तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिसमें दो भारतीय भाषाएं होंगी. हालांकि जिन छात्रों ने पहले ही दो गैर-भारतीय भाषाएं चुन ली हैं, उन्हें तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा पढ़नी होगी.इनके लिए भी कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी. इसके अलावा छठी क्लास में पढ़ने वाले छात्रों के आने वाले सभी बैचों के लिए दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा. जब ये बैच आगे चलकर कक्षा 10वीं में पहुंचेगा, तब इन्हें तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा देनी होगी.
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