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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मेडिकल फीस नहीं भर सकते तो स्कॉलरशिप लो, जानें प्राइवेट कॉलेज में कैसे पढ़ सकते हैं गरीब छात्र

प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की भारी फीस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम चर्चा हुई. अदालत ने कहा कि कम आय वाले छात्रों के लिए स्कॉलरशिप और ब्याज में राहत जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. जानिए मेडिकल पढ़ाई का खर्च कम करने के कौन-कौन से रास्ते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मेडिकल फीस नहीं भर सकते तो स्कॉलरशिप लो, जानें प्राइवेट कॉलेज में कैसे पढ़ सकते हैं गरीब छात्र
सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस कम करने का कोई आदेश नहीं दिया है.

Private Medical Colleges Fees: NEET के जरिए मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने का सपना हर साल लाखों छात्र देखते हैं. सरकारी कॉलेजों में फीस कम होती है, लेकिन सीटें लिमिटेड होती हैं. ऐसे में कई स्टूडेंट्स को प्राइवेट मेडिकल कॉलेज का ऑप्शन चुनना पड़ता है. परेशानी तब आती है जब कॉलेज की फीस 15 से 25 लाख रुपये सालाना तक पहुंच जाती है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में इसी मुद्दे पर सुनवाई हुई. अदालत ने कहा कि कम आय वाले परिवारों के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप और ब्याज में राहत जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. ऐसे में छात्रों को इन ऑप्शंस की जानकारी जरूर रखनी चाहिए.

स्कॉलरशिप से मिल सकती है बड़ी मदद

स्कॉलरशिप पढ़ाई के लिए मिलने वाली पैसों की मदद होती है. यह मदद केंद्र सरकार, राज्य सरकार, निजी संस्थाओं, ट्रस्ट या खुद कॉलेज की तरफ से दी जा सकती है. कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेज ऐसे छात्रों को फीस में छूट भी देते हैं, जिनके परिवार की कमाई कम होती है या जिन्होंने पढ़ाई में अच्छे नंबर हासिल किए होते हैं. इसके अलावा कई राज्यों में स्कॉलरशिप स्कीम भी चलती हैं. अगर कोई छात्र जरूरी शर्तें पूरी करता है, तो उसे पढ़ाई का खर्च कम करने में अच्छी मदद मिल सकती है.

क्या होती है ब्याज में राहत की सुविधा

मेडिकल की पढ़ाई के लिए कई स्टूडेंट्स एजुकेशन लोन लेते हैं. लोन लेने के बाद उसकी रकम के साथ ब्याज भी चुकाना पड़ता है. ऐसे में ब्याज में राहत की सुविधा काफी काम आ सकती है. इस सुविधा में कुछ समय तक ब्याज का पूरा या कुछ खर्च सरकार या किसी स्कीम के जरिए भरा जाता है. इससे पढ़ाई के दौरान छात्र और उसके परिवार पर पैसों का बोझ कम हो जाता है. लोन छात्र के नाम पर रहता है, लेकिन ब्याज का कुछ खर्च दूसरी तरफ से उठाया जा सकता है.

सीट मिलने के बाद क्या करना चाहिए

अगर किसी EWS छात्र को प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में सीट मिल जाती है, तो सबसे पहले उसे कॉलेज की स्कॉलरशिप पॉलिसी के बारे में जानकारी लेनी चाहिए. कई कॉलेज अपने लेवल पर भी फीस में छूट या दूसरी मदद देते हैं. इसके साथ ही राज्य सरकार की स्कॉलरशिप स्कीम, नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल और एजुकेशन लोन के विकल्प भी जरूर देखने चाहिए. कई बैंक मेडिकल पढ़ाई के लिए खास एजुकेशन लोन देते हैं, जिनमें ब्याज में राहत का फायदा भी मिल सकता है.

फीस कम करने का आदेश नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस कम करने का कोई आदेश नहीं दिया है. हालांकि अदालत ने ये जरूर कहा कि कम आय वाले छात्रों के लिए मदद के कई रास्ते हैं. अगर किसी छात्र को फीस भरने में परेशानी हो रही है, तो उसे स्कॉलरशिप, एजुकेशन लोन और ब्याज में राहत देने वाली स्कीम की जानकारी जरूर लेनी चाहिए. सही जानकारी और सही समय पर मदद मिलने से मेडिकल पढ़ाई का सपना पूरा करना आसान हो सकता है.

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