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UPSC का 'ऑपरेशन क्लीन': इंटरव्यू तक पहुंचने से पहले ही सैकड़ों उम्मीदवार बाहर, AI का बड़ा इस्तेमाल

आवेदन स्तर पर ही की गई इस सख्त जांच में एआई ने आयोग के 15 साल पुराने डेटाबेस को खंगालकर 569 अयोग्य उम्मीदवारों के आवेदन रद्द कर दिए, जो उम्र या प्रयासों की सीमा पार कर चुके थे.

UPSC का 'ऑपरेशन क्लीन': इंटरव्यू तक पहुंचने से पहले ही सैकड़ों उम्मीदवार बाहर, AI का बड़ा इस्तेमाल
यूपीएससी के चेयरमैन अजय कुमार ने इस पूरी पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस नई तकनीक का मकसद परीक्षा प्रक्रिया में पूरी तरह निष्पक्षता और पारदर्शिता लाना है.

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE 2026) की शुचिता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल करके आवेदन के लेवल पर ही नियमों का उल्लंघन करने वाले 569 उम्मीदवारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. ये ऐसे उम्मीदवार थे, जो या तो परीक्षा के लिए तय उम्र सीमा पार कर चुके थे या फिर अपने वर्ग के अनुसार मिलने वाले अटेंप्टस (Attempts) की अधिकतम संख्या पूरी कर चुके थे. बता दें कि अब तक UPSC उम्मीदवारों के डॉक्यूमेंट्स और उनकी एलिजिबिलिटी (Eligibility) की गहन जांच परीक्षा के सबसे अंतिम चरण यानी इंटरव्यू के समय करता था.

कई बार ऐसा होता था कि नियमों के खिलाफ जाकर फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थी प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक पहुंच जाते थे, जिससे एलिजिबल कैंडिडेट्स का मौका छिन जाता था.लेकिन 2026 की परीक्षा में आयोग ने एतिहासिक कदम उठाते हुए शुरुआत में ही ऐसे फर्जी या अयोग्य आवेदनों को रिजेक्ट कर दिया.

यह कदम क्यों उठाया गया?

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ समय पहले ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर का मामला काफी सुर्खियों में रहा था, जिसके बाद उन पर सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हुई. इस बड़े विवाद के बाद यूपीएससी ने अपनी सेलेक्सन प्रोसेस को ज्यादा, पारदर्शी और फूलप्रूफ बनाने के लिए तकनीकी उपायों को तेजी से लागू किया है. इसी कड़ी में इस साल आधार कार्ड के जरिए वेरिफिकेशन और एआई तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया.

क्या हैं यूपीएससी में उम्र और प्रयासों के नियम?

  • सामान्य वर्ग (General Category) के लिए अधिकतम उम्र 32 वर्ष और कुल 6 प्रयास हैं.
  • वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अधिकतम आयु 35 साल और कुल 9 प्रयास निश्चित किए गए हैं.
  • जबकि अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के लिए अधिकतम आयु 37 वर्ष और असीमित (Unlimited) प्रयास दिए गए हैं.

AI के इस्तेमाल से क्या हुआ फायदा

एआई सिस्टम ने इन्हीं नियमों को आधार बनाकर आयोग के पास आए लाखों आवेदनों की बारीकी से जांच की और गड़बड़ी करने वालों को पकड़ लिया.

आधार वेरिफिकेशन और AI से फर्जी आवेदनों में आई कमी

इस साल 24 मई 2026 को आयोजित हुई सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (UPSC Prelims) के लिए लगभग 9.9 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 5.49 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में बैठे. साल 2025 में करीब 9.5 लाख आवेदन आए थे, लेकिन इस बार कड़े नियमों के कारण डुप्लीकेट और संदिग्ध आवेदनों में भारी कमी देखी गई है.

यूपीएससी के नए पोर्टल पर इस बार उम्मीदवारों को आधार आधारित ऑथेंटिकेशन का विकल्प दिया गया था, जिसका उपयोग लगभग 94 फीसदी आवेदकों ने किया. इससे फर्जी और एक से अधिक फॉर्म भरने की संभावना बेहद कम हो गई.

15 साल पुराने डेटाबेस की हुई जांच

जिन 49 हजार उम्मीदवारों ने आधार वेरिफिकेशन का विकल्प नहीं चुना था, उनके फॉर्म की जांच के लिए एआई टूल का विशेष रूप से उपयोग किया गया. एआई ने इन आवेदकों के नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि और फोटो का मिलान यूपीएससी के पिछले 15 सालों के पूरे डेटाबेस से किया.
इस गहराई से की गई जांच में पता चला कि 569 उम्मीदवार नियमों के खिलाफ जाकर दोबारा परीक्षा देने की कोशिश कर रहे थे, जिनमें से 85 उम्मीदवार ऐसे थे जो अपने सभी चांस खत्म कर चुके थे. इन सभी के आवेदन तुरंत रद्द कर दिए गए.

IFS एग्जाम में भी हुआ फायदा

यही नहीं, आयोग ने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) परीक्षा में भी इसी तकनीक से 69 अयोग्य उम्मीदवारों की पहचान कर उनके फॉर्म रिजेक्ट किए.

कैटेगरी बदलने वाले 43 हजार उम्मीदवार भी रडार पर

जांच के दौरान एक और दिलचस्प बात सामने आई. एआई ने ऐसे 43,497 उम्मीदवारों की भी पहचान की जिन्होंने अपने पिछले प्रयासों की तुलना में इस बार अपनी कैटेगरी (Category) बदल ली थी. जैसे- कुछ उम्मीदवारों ने पहले सामान्य वर्ग से फॉर्म भरा था, लेकिन इस बार ओबीसी या अन्य आरक्षित वर्ग से आवेदन किया था.

यूपीएससी ने इन सभी उम्मीदवारों को ई-मेल भेजकर इस बदलाव का कारण और इसकी पुष्टि मांगी. जांच में पाया गया कि कई अभ्यर्थियों के पास पहले जरूरी सर्टिफिकेट नहीं थे, इसलिए उन्होंने सामान्य वर्ग चुना था और सर्टिफिकेट बनने के बाद उन्होंने अपनी कैटेगरी अपडेट की. आयोग ने केवल उन्हीं फॉर्म्स को रद्द किया, जो वास्तव में नियमों का उल्लंघन कर रहे थे.

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