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गांव के बच्चों की संवारी जिंदगी, ऐसे टीचरों की कहानी, जिन्हें मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु देश के 48 शिक्षकों को 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार' से आज सम्मानित करेंगी. देश के हर कोने से इन शिक्षकों का चयन इस अवार्ड के लिए किया गया है. आज हम आपको तीन ऐसी महिला टीचरों की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने पढ़ाई के जरिए बच्चों की जिंदगी बदल दी.

गांव के बच्चों की संवारी जिंदगी, ऐसे टीचरों की कहानी, जिन्हें मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड
48 स्कूली शिक्षकों को 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार' से किया जाएगा सम्मानित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज विज्ञान भवन में शिक्षक दिवस के अवसर पर 48 स्कूली शिक्षकों को 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार' से सम्मानित करने जा रही है. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए योग्य शिक्षकों को शिक्षा मंत्रालय के पोर्टल के जरिए ऑनलाइन खुद को नॉमिनेट करने के लिए आमंत्रित किया गया था. नॉमिनेशन की प्रक्रिया 15 जून से 20 जुलाई तक खुली थी. वहीं चुन गए टीचर्स को आज नेशनल टीचर्स अवार्ड मिलने जा रहा है. आज हम आपको तीन ऐसी महिला शिक्षकों की कहानी बताने जा रहे हैं, जो कड़ी मेहनत के बाद ये अवार्ड हासिल करने जा रही हैं.

मध्य प्रदेश की अर्चना शुक्ला

सबसे पहले कहानी मध्य प्रदेश की अर्चना शुक्ला की. अर्चना शुक्ला पढ़ाई को किताबों और क्लास रूम से आगे लेकर गई. उन्होंने नए-नए तरीकों के जरिए बच्चों को पढ़ाया है और आसान तरीके से उनको चीजे बताई.  Project-Based Learning (PBL) की मदद से उन्होंने कई बच्चों की रुचि पढ़ाई की ओर से खींची. इतना ही नहीं उनके पढ़ाए गए बच्चों ने जापान में भी अपने मॉडल पेश किए.  अर्चना शुक्ला को उनके पढ़ाने के अनोखे तरीके के लिए अब अवार्ड मिल रहा है.

बिहार की खुशबू कुमारी

बिहार की खुशबू कुमारी को भी आज राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 मिलने जा रहा है. बांका जिले से नाता रखने वाली खुशबू कुमारी 13 सालों से शिक्षक के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं. खुशबू कुमारी ने बच्चों के लिए पढ़ाई को सरल बनाया और रोचक तरीके से चीजों को समझाया. इतना ही नहीं खुशबू ने गांव के बच्चों को 'गुड टच और बैड टच' जैसी जरूरी चीज की शिक्षा भी दी और बताया कि 'गुड टच और बैड टच' क्या होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से पहले उन्हें ओर भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं.

गाजियाबाद की रेनू त्रिपाठी

शिक्षक दिवस के मौके पर गाजियाबाद की रेनू त्रिपाठी की भी  राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार मिलने जा रहा है. राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में बच्चों को पढ़ाने वाली रेनू त्रिपाठी का जीवन संघर्ष भरा रहा था. उनके माता-पिता ने उन्हें नौकरी करने की अनुमति नहीं दी थी. लेकिन शादी के बाद उन्हें ससुराल वालों का साथ मिला और अपने सपनों को सच कर पाई. वहीं बच्चों को बचाने के लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी बच्चों को प्रैक्टिकल कराने में ज्यादा ध्यान दिया. प्रैक्टिकल के जरिए बच्चो सीखाया. 

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