आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री एस्थर डुफ्लो ने कॉलेज शिक्षा के ढांचे पर पुनर्विचार का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को व्यावसायिक प्रशिक्षण पर कम और छात्रों को तेजी से बदलती दुनिया में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए तैयार करने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना चाहिए. जयपुर में 19वें जयपुर साहित्य महोत्सव (जेएलएफ) में डुफ्लो ने प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेजी से हो बदलावों पर अपने विचार जाहिर किए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उच्च शिक्षा को केवल नौकरी के लिए तैयार ग्रेजुएट्स की फौज खड़ी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मानविकी में एक मजबूत आधार प्रदान करना चाहिए, जो तकनीकी विषय की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए भी एक जरूर घटक है.
छात्रों के लिए ये चीज है जरूरी
डुफ्लो ने कहा, “परिदृश्य इतनी तेजी से बदल रहा है कि आप किसी व्यक्ति को जो खास स्किल सिखा रहे हैं, वह उसकी पढ़ाई पूरी होने तक खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएगा और उसके नौकरी की तलाश शुरू करने तक निश्चित रूप से खत्म हो जाएगा. हमें कॉलेज शिक्षा के ढांचे पर इस तरह से पुनर्विचार करना होगा कि यह छात्रों को तेजी से बदलती दुनिया में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए तैयार कर सके.”
उन्होंने कहा, “मेरे विचार से इसका मतलब यह है-जिसमें कुछ हद तक स्वार्थ भी झलक सकता है-कि कॉलेज शिक्षा में मानविकी की मजबूत पृष्ठभूमि को समाहित किया जाना चाहिए, जिसमें लिखने की क्षमता, सोचने की क्षमता और अपने लिए निर्णय लेने की क्षमता शामिल है.”
कॉलेज के सिलेबस में शामिल हो ये चीज
उच्च शिक्षा का ढांचा कैसा होना चाहिए, इसे समझाने के लिए डुफ्लो ने जीपीएस का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कुछ विशिष्ट कौशल भले ही जल्द अप्रचलित हो सकते हैं, लेकिन सीखने, अनुकूलन करने और सही निर्णय लेने की क्षमता बनी रहती है. डुफ्लो ने स्पष्ट लेखन, आलोचनात्मक चिंतन और स्वतंत्र निर्णय लेने जैसे कौशलों को कॉलेज शिक्षा में शामिल किए जाने वाले अहम पहलु करार दिया. उन्होंने कहा कि दर्शनशास्त्र, नैतिक शिक्षा और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय इन क्षमताओं को विकसित करने में जरूरी भूमिका निभाते हैं.
डुफ्लो ने कहा, कोड लिखने की कला सीखने के साथ-साथ आपको मूलभूत संभाव्यता और सांख्यिकी सीखने की जरूरत है, क्योंकि यही वो चीजें हैं, जो इन चीजों के मूल में हैं और आगे बढ़ने में आपकी मदद करेंगी. उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए तरक्की के लिए शिक्षा के मूलभूत सिद्धांतों की ओर लौटना जरूरी हो सकता है.
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