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हायर एजुकेशन और हेल्थ में AI का बड़ा रोल, रटने की आदत भी होगी खत्म- उच्च शिक्षा सचिव ने बताया क्या है जरूरी

उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने कहा कि नई तकनीक के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाली है. इसी कड़ी में शिक्षा मंत्रालय ने दो दिन का भारत बोधन समिट आयोजित किया. इससे पहले 12 फरवरी को देशभर के करीब 1000 शिक्षण संस्थानों में रनअप कार्यक्रम किए गए. ताकि एआई को लेकर जागरूकता और चर्चा बढ़ाई जा सके.

हायर एजुकेशन और हेल्थ में AI का बड़ा रोल, रटने की आदत भी होगी खत्म- उच्च शिक्षा सचिव ने बताया क्या है जरूरी
हम रटने की परंपरा को खत्म करना चाहते हैं: उच्च शिक्षा सचिव

इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इम्पैक्ट समिट 2026 दिल्ली के भारत मंडपम में 16-20 फरवरी तक होने वाला है. इस बीच AI को लेकर NDTV ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी से खास बातचीत की. इस दौरान उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने बताया कि कैसे AI की मदद से पढ़ाई के तरीके को बदलने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में AI कितना जरूरी है, इसपर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि शिक्षा में रटने की परंपरा को AI खत्म कर देगा. 

विनीत जोशी ने AI पर बात करते हुए कहा,  हम रटने की परंपरा को खत्म करना चाहते हैं. इस वजह से AI की जरूरत हमारे शिक्षा पद्धति में बहुत जरूरी है. इसीलिए छात्रों से पहले टीचर्स को AI तकनीकी में ट्रेंड करना बहुत जरूरी है. यही वजह है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में AI के तकनीकी का इस्तेमाल जरूरी बनाया गया है. अगले हफ्ते शुरू होने जा रहे AI समिट को लेकर देशभर में तैयारियां तेज हैं. इस समिट को भारत के शिक्षा तंत्र के लिए बेहद जरूरी  है.

उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने कहा कि नई तकनीक के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाली है. इसी कड़ी में शिक्षा मंत्रालय ने दो दिन का भारत बोधन समिट आयोजित किया. इससे पहले 12 फरवरी को देशभर के करीब 1000 शिक्षण संस्थानों में रनअप कार्यक्रम किए गए. ताकि एआई को लेकर जागरूकता और चर्चा बढ़ाई जा सके.

स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा में AI का बड़ा रोल 

विनीत जोशी के मुताबिक, AI का उपयोग सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पढ़ाने के तरीके में सुधार रिसर्च और रिसर्च एक्सटेंशन, इनोवेशन और स्टार्टअप इंडस्ट्री-एकेडमिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आएगा. उनका कहना है कि AI के जरिए छात्र किसी भी विषय को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और उसे वास्तविक जीवन में लागू करना आसान होगा.

रटने की परंपरा से बाहर निकलने की जरूरत

उन्होंने कहा कि पहले भारतीय शिक्षा व्यवस्था सवाल-जवाब आधारित थी, लेकिन रटने की आदत बढ़ गई. खुद प्रधानमंत्री भी कई बार कह चुके हैं कि एकतरफा रटने की प्रवृत्ति को खत्म करने की जरूरत है. अक्सर बच्चे क्लासरूम में सवाल पूछने में झिझकते हैं. उन्हें डर रहता है कि कहीं उनका सवाल गलत न हो या शिक्षक ठीक से जवाब न दें. लेकिन अब AI के माध्यम से छात्र बिना झिझक कोई भी सवाल पूछ सकते हैं और तुरंत जवाब पा सकते हैं.

लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

विनीत जोशी ने AI के सही और गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि छात्र पूरी तरह AI पर निर्भर न हो जाएं. उन्हें खुद सोचने और समझने की आदत भी बनाए रखनी होगी.

विनीत जोशी ने कहा कि बच्चों से पहले शिक्षकों को AI की सही जानकारी और प्रशिक्षण देना ज्यादा जरूरी है. अगर शिक्षक सक्षम होंगे, तभी छात्र AI का संतुलित और सही उपयोग कर पाएंगे.

नई शिक्षा नीति 2020 में पहले ही था संकेत

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में साफ कहा गया था कि आनेवाले समय में टेक्नोलॉजी, खासकर AI का इस्तेमाल बढ़ेगा. भारत अगर विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनना चाहता है, तो उसे शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में तकनीक का पूरा लाभ उठाना होगा. उच्च शिक्षा सचिव के मुताबिक, AI के जरिए भारत अपने लक्ष्यों को तेजी से हासिल कर सकता है और विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकता है.

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