Odisha School Books Controversy : ओडिशा में स्कूली किताबों को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक की किताबों की छपाई पर करीब 175 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन बाद में इनमें 1,741 गलतियां मिलीं. इनमें स्पेलिंग, ग्रामर और टाइपिंग की बड़ी संख्या में गलतिया हैं. मामला सामने आने के बाद सरकार ने किताबों में सुधार शुरू कर दिया है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी है. इसके अलावा किताबों में सुधार के लिए 661 सुझाव भी प्राप्त हुए हैं.
साइंस की किताब में सबसे ज्यादा गलती
मंत्री द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, आठवीं कक्षा की विज्ञान की किताब में सबसे ज्यादा 294 गलतियां पाई गईं. इसके अलावा सातवीं की उर्दू किताब में 121, आठवीं की संस्कृत में 114, छठी की सामाजिक विज्ञान में 98 और सातवीं की संस्कृत की किताब में 92 गलतियां सामने आई हैं.
गोंड ने कहा कि किताबों के संशोधित संस्करणों में इन सभी त्रुटियों को दूर करने के कदम उठाए गए हैं. भविष्य में ऐसी गलतियों न हो इसके लिए सब्जेक्ट और लैंग्वेज एक्सपर्ट्स द्वारा फैक्ट्स की जांच कराने जैसे विशेष उपाय लागू किए गए हैं. अब त्रुटिहीन किताबें छापकर छात्रों को बांटी जा रही हैं.
एक अन्य बयान में मंत्री ने बताया कि टेक्स्टबुक्स के पब्लिश की जिम्मेदारी शिक्षक शिक्षा निदेशालय और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (टीई एंड एससीईआरटी) को दी गई थी और किताबें परिषद द्वारा तैयार मसौदे के अनुसार ही छापी गई थीं.
अधिकारियों को किया गया निलंबित
उन्होंने कहा कि छपाई और बांटने के बाद जब गलतियां सामने हुईं, तो सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन निदेशक और तीन सहायक निदेशकों को निलंबित कर दिया, जबकि छह अन्य सहायक निदेशकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है.
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