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नोएडा के स्कूलों में स्क्रीन टाइम फिक्स, इन चीजों के लिए करना होगा ब्लैकबोर्ड का इस्तेमाल

Noida Schools Screen Time: नोएडा के कुछ अभिभावकों ने शिकायत की थी कि स्कूल में बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार 5 से 6 घंटे तक का हो रहा है, ऐसे में अब प्रशासन ने स्क्रीन टाइम की लिमिट तय कर दी है.

नोएडा के स्कूलों में स्क्रीन टाइम फिक्स, इन चीजों के लिए करना होगा ब्लैकबोर्ड का इस्तेमाल
नोएडा के स्कूलों में स्क्रीन टाइम तय

देशभर के तमाम स्कूलों में अब डिजिटल रूप से पढ़ाई शुरू हो चुकी है, छात्र ब्लैक बोर्ड की बजाय सीधे स्क्रीन पर देखकर चीजों को समझ रहे हैं और ये प्रैक्टिस लगातार बढ़ रही है. हालांकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इस पर लिमिट तय कर दी गई है. स्कूली बच्चों के स्मार्ट और डिजिटल बोर्ड के ज्यादा  इस्तेमाल की शिकायतों के बाद, जिला प्रशासन ने रोजाना के स्क्रीन टाइम की सीमा तय कर दी है. अब प्राइमरी के छात्रों के लिए अधिकतम 30 मिनट और अपर प्राइमरी के छात्रों के लिए अधिकतम 60 मिनट का स्क्रीन टाइम तय किया गया है.

सभी स्कूलों पर लागू होगा नियम

गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने एक बयान में बताया कि यह निर्देश जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त (एडेड) और प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा. नियमों का पालन करवाने के लिए मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है.

क्यों लिया गया फैसला?

स्मार्ट बोर्ड के लगातार इस्तेमाल पर अभिभावकों की शिकायतें आ रही थीं, उनकी चिंता थी कि उनके बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी ज्यादा हो चुका है. शिकायत थी कि कई स्कूलों में चार से पांच घंटे तक लगातार स्मार्ट बोर्ड का इस्तेमाल हो रहा है. किताबें दिखाने, क्लासवर्क कराने, सवाल-जवाब और होमवर्क तक के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल किया जा रहा था. इस पर अब प्रशासन ने संज्ञान लिया और कहा कि टेक्नोलॉजी का गैर-जरूरी इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. 

बच्चों के लिए खतरनाक है लंबा स्क्रीन टाइम

प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों में कई तरह की दिक्कतें देखी जा सकती हैं. जिनमें- आंखों में खिंचाव, मायोपिया, सिरदर्द होना और ध्यान भटकने जैसी समस्याएं शामिल हैं. यही वजह है कि अब स्कूलों में स्क्रीन के लिए नियम बना दिए गए हैं. 

स्क्रीन टाइम के क्या हैं नियम?

स्मार्ट बोर्ड का इस्तेमाल सिर्फ मुश्किल कॉन्सेप्ट को समझाने, तस्वीरें या वीडियो दिखाने और जरूरी शिक्षण सामग्री के लिए ही किया जाएगा. 

लिखने, प्रैक्टिस करने, सवाल-जवाब और अन्य गतिविधियों के लिए ब्लैकबोर्ड, व्हाइटबोर्ड या ग्रीनबोर्ड का इस्तेमाल अनिवार्य होगा. 

स्क्रीन की ब्राइटनेस और क्लास की लाइट को सही रखा जाए. बच्चों को स्क्रीन से उचित दूरी पर बैठाया जाए और लगभग 20 मिनट के स्क्रीन इस्तेमाल के बाद ब्रेक दिया जाए.

ऑनलाइन क्लासेस के लिए NCERT की गाइडलाइन और 20-20-20 नियम को फॉलो करने को कहा गया है. इसके तहत हर 20 मिनट की स्क्रीन के बाद बच्चों को 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखना चाहिए.

स्कूलों को हर तीन महीने में बच्चों की आंखों की जांच कराने और रिपोर्ट अभिभावकों के साथ शेयर करने के निर्देश दिए गए हैं.

स्कूलों को 'डिजिटल-फ्री पीरियड', 'डिजिटल जीरो डे' और 'डिजिटल डिटॉक्स' जैसी गतिविधियां शुरू करने को कहा गया है, ताकि बच्चों को खेलकूद, पढ़ाई और सामाजिक जुड़ाव का पूरा मौका मिले.

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