केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NDTV से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने नीट यूजी-री एग्जाम देने वाले एक छात्र का अबू धाबी सेंटर पड़ने के मामले पर कहा कि जब इसके बारे में पता चलता तो एनटीए ने क्या कदम उठाए.
जब अबू धाबी सेंटर पड़ने की बात सामने आई तो...
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NDTV से कहा, '19 जून को एनटीए को ये खबर मिली थी. बच्चे या फिर पिता ने एनटीए से संपर्क नहीं किया था, इसके बाद भी एनटीए ने उनसे संपर्क किया और छात्र का सेंटर नागपुर कर दिया गया. दूसरे दिन उसके पिताजी ने अव्यवस्था की बात कही और फिर राहुल गांधी ने इसे लेकर बयान जारी किया.' शिक्षा मंत्री ने आगे कहा, 'बाद में सच्चाई सामने आने के बाद वो मुंह छिपाए घूमते रहे. तीन बार उस छात्र के पिता के फोन से ही अबू धाबी सेंटर देने के लिए आवेदन किया गया था'.
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क्या था मामला
बता दें कि छात्र अब्दुल्ला के परिवार ने कहा था, अब्दुल्ला ने आवेदन करते समय नागपुर, वर्धा और भंडारा को परीक्षा के लिए अपनी पसंद के शहरों के तौर पर चुना था. लेकिन, उसके एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र अबू धाबी, यूएई में दिखाया गया. नीट अभ्यर्थी अब्दुल्ला के पिता मोहम्मद तालिब ने विदेश में परीक्षा केंद्र मिलने पर हैरानी और उलझन जाहिर की थी. उन्होंने कहा था, 'मुझे नहीं पता कि ऐसा कैसे हुआ. अब सिर्फ एजेंसी ही इसका कारण बता सकती है'.
कोचिंग माफिया पर नजर
खास इंटरव्यू में शिक्षा मंत्री ने कहा, 'क्वेश्चन सेटर्स को कहा गया था कि एनसीईआरटी (NCERT) सिलेबस के इर्द-गिर्द ही सवालों को रखा जाए. हमारे देश के गरीब छात्र और पिछड़े इलाकों से आने वाले छात्रों ने जो पढ़ा है, उसकी समझ को परखना है. कुछ लोग जानबूझकर शिक्षा को डिरेल करने की कोशिश कर रहे हैं. फिर चाहे वो कोचिंग सेंटर वाले हों या फिर शिक्षा माफिया हों, इन पर नजर रखी जा रही है. हम इन्हें घुटने पर लाएंगे, नहीं तो हम देश के बच्चों के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकते हैं'.
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