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12वीं से पहले नहीं पता था क्या होता है NEET, राजस्थान में पेंटर का बेटा बनेगा डॉक्टर

NEET UG 2026 Success Story: राजस्थान के बूंदी जिले के रहने वाले सूरज सैनी ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे आर्थिक तंगी भी हार मान लेती है.

12वीं से पहले नहीं पता था क्या होता है NEET, राजस्थान में पेंटर का बेटा बनेगा डॉक्टर

NEET UG 2026 Success Story: राजस्थान के बूंदी जिले के रहने वाले सूरज सैनी ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे आर्थिक तंगी भी हार मान लेती है. कभी परिवार की मदद के लिए गांवों में घरों की पेंटिंग और सफेदी का काम करने वाले सूरज ने NEET UG 2026 में 583 अंक (99.16 पर्सेंटाइल) हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का रास्ता बना लिया है. 

राजस्थान के बूंदी जिले के रहने वाले हैं सूरज 

सूरज राजस्थान के बूंदी जिले के कापरेन कस्बे के रहने वाले हैं. उन्होंने हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की. कक्षा 10 में उन्होंने 87 प्रतिशत और कक्षा 12 में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए. हालांकि डॉक्टर बनने का सपना उन्होंने बचपन से नहीं देखा था. सूरज ने बताया कि उन्हें कक्षा 12 तक NEET परीक्षा के बारे में जानकारी भी नहीं थी. उनकी मौसी ने उन्हें इस परीक्षा के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया. 

परिवार की मदद के लिए करते थे पेंटिंग का काम

आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण सूरज छुट्टियों और खाली समय में आसपास के गांवों में घरों की रंगाई-पुताई का काम करते थे. उन्होंने यह काम किसी प्रशिक्षण से नहीं, बल्कि दूसरों को देखकर सीखा. इस काम से मिलने वाली कमाई से वे परिवार की आर्थिक मदद करते थे. 

खेतों में मजदूरी करती हैं मां 

सूरज की मां घीसी बाई खेतों में मजदूरी करती हैं. परिवार की आर्थिक तंगी इतनी थी कि उनकी छोटी बहन गरिमा को कक्षा 8 के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी और मां के साथ खेतों में काम करना पड़ा. अब सूरज चाहते हैं कि उनकी बहन दोबारा स्कूल जाए और अपनी पढ़ाई पूरी करे. 

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

सूरज ने पहली बार 2024 में NEET परीक्षा दी थी, लेकिन तैयारी पूरी नहीं होने के कारण सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक स्वयं पढ़ाई की और बाद में कोटा स्थित Allen Career Institute के एक छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत उन्हें मुफ्त कोचिंग और रहने की सुविधा मिलींं. यहीं से उनकी तैयारी को सही दिशा मिली और तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल की. 

'कोचिंग जरूरी नहीं, सही मार्गदर्शन जरूरी है'

सूरज का कहना है कि सफलता के लिए केवल कोचिंग ही जरूरी नहीं होती, बल्कि सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास अधिक महत्वपूर्ण है. उनके अनुसार, शुरुआत में उन्हें यह भी नहीं पता था कि तैयारी कैसे करनी है. शिक्षकों ने उन्हें पहले बुनियादी अवधारणाएं मजबूत करने और फिर नियमित अभ्यास पर ध्यान देने की सलाह दी. 

सूरज ने छात्रों को दी यह सलाह

सूरज का मानना है कि जो छात्र डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, उन्हें कक्षा 11 से ही NEET की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. उनका कहना है कि NCERT की किताबों पर अच्छी पकड़ और रोजाना प्रश्नों का अभ्यास ही सफलता दिला सकता है. उनका मानना है कि अगर उन्होंने भी कक्षा 11 से तैयारी शुरू की होती, तो उन्हें अतिरिक्त संघर्ष नहीं करना पड़ता. 

सरकारी मेडिकल कॉलेज में मिलेगा दाखिला

583 अंकों और 99.16 पर्सेंटाइल के साथ सूरज को भरोसा है कि उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट मिल जाएगी. भविष्य में वह डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं. 

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