राजकीय इंटर कॉलेज बलिया में कला शिक्षक के पद पर तैनात डा.इफ्तेखार खान बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है. इफ्तेखार राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए सिलेक्ट हुए हैं. शिक्षक दिवस के दिन यानि 5 सितम्बर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन्हें सम्मानित करेंगी. सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के छोटे से गांव कीकोढा में पैदा हुए डा. इफ्तेखार खान की प्राथमिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में हुई. इनके पिता इसी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक भी थे. गांव से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद इफ्तेखार खान बलिया चले आये और सतीश चंद कालेज से विज्ञान से स्नातक की पढ़ाई करने लगे.
इंदिरा गांधी का चित्र बनाकर मिली कला की नई दिशाइसी बीच कालेज में ही एक कार्यक्रम के दौरान इन्होने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी का एक चित्र बनाया जिसके बाद सतीश चंद कालेज के ही एक शिक्षक रघुबंश मणि पाठक ने इन्हें कला के प्रति जागरूक किया और फिर डा.इफ्तेखार खान विज्ञान की पढ़ाई छोड़कर काशी विद्यापीठ वाराणसी में कला स्नातक ( बैचलर आफ फाइन आर्ट ) में दाखिला ले लिया
फिर यहीं से उन्होंने मास्टर आफ फाइन आर्ट और फिर पी. एच. डी. की उपाधि ली. पी. एच. डी. की उपाधि लेने के बाद इन्होंने एक प्राइवेट विज्ञापन एजेंसी में नौकरी करना शुरू कर दिया. करीब दो साल काम करने के दौरान ही साल 1998 में इनकी नियुक्ति राजकीय इंटर कॉलेज बलिया में कला शिक्षक के रूप में हुई. उसके बाद इन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और पुरे मनोयोग से बच्चों को कला की शिक्षा देने लगे.
हजारों छात्रों को दी निःशुल्क कला शिक्षाशिक्षक इफ्तेखार खान विद्यालय के साथ साथ बच्चों को अपने घर पर फ्री शिक्षा देने का काम करते हैं और इनसे कला की शिक्षा लेने के लिए यूपी के अलग-अलग जिलों के अलावा बिहार से भी छात्र आते हैं. जिन्हें फ्री में कला के गुर सिखाते हैं.
गुरु दक्षिणा में मांगा पेड़ लगाने का वादाइफ़्तेख़ार खान बताते हैं कि एक बार एक बच्चे के अविभावक ने गुरु दक्षिणा देने कि जिद कि तो उन्होंने उस अविभावक से सिर्फ एक पेड़ लगाने के लिए लिए कहा और फिर उसके बाद हर बच्चे से सार्वजनिक स्थानों पर पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करने लगे. उनके इस काम में जिला प्रशासन भी सहयोग करने लगा.
इफ्तेखार खान ने बताया कि वो अब तक दो से ढाई हजार बच्चों को फाइन आर्ट की शिक्षा दे चुके हैं और इनके पढ़ाए हुए दो सौ से अधिक शिष्य आज देश-विदेश में बड़ी-बड़ी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे है. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए सिलेक्ट होने पर शिक्षक इफ्तेखार खान का कहना है कि वो बहुत खुश हैं और इसका पूरा श्रेय उनके माता पिता को जाता है, जो खुद एक कलाकार थे.
इसके साथ ही वह क्रेडिट उन लोगों को भी देते हैं जिन्होंने ने उनकी हौसलाफजाई की है. उनका कहना है की उन्हें यह पुरस्कार नवाचार के लिए दिया जा रहा है. वहीं, इनके विद्यालय के साथी शिक्षक भी काी खुश हैं और उनका कहना है कि इससे विद्यालय की गरिमा तो बढ़ी ही है पुरे जिले को सम्मान मिला है. हम सब तो पहले से ही इन्हें कला गुरु के नाम से पुकारते है.
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