जेईई एडवांस्ड 2026 का रिजल्ट देर रात जारी हो गया है और कोटा कोचिंग ने एक बार फिर बाजी मारी है. कोटा कोचिंग में पढ़ने वाले शुभम कुमार ने ऑल इंडिया में पहली रैंक हासिल की है. वहीं दूसरी रैंक पर भी कोटा कोचिंग के छात्र का ही कब्जा रहा है. कोटा की कोचिंग में पढ़ाई करने वाले कबीर छिल्लर ने दूसरी रैंक हासिल की है. आईआईटी रुड़की ने देर रात एडवांस का रिजल्ट जारी किया है. रिजल्ट जारी होने के बाद कोटा में एक बार फिर जश्न का माहौल है. ऑल इंडिया पहले रैंक हासिल करने वाले शुभम कुमार के जेईई मेन में 6th रैंक मिली थी. लेकिन शुभम ने एडवांस में सभी को पीछे छोडते हुए पहली रैंक पर कब्ज़ा जमाया है.
कोटा में आकर ली कोचिंग
यह उपलब्धि कड़ी मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है. शुभम पिछले दो वर्षों से एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा के रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट हैं. पिता शिवकुमार व्यवसायी हैं और माता कंचन देवी गृहिणी हैं. इससे पूर्व शुभम ने 10वीं कक्षा 98.5 प्रतिशत अंकों से पास की थी.
शुभम ने बताया कि मेरी सक्सेस का क्रेडिट मैं फैकल्टीज के मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और परिवार के सहयोग को देता हूं. सबसे बड़ा कारण मेरे टीचर्स हैं. मैंने हमेशा उनकी बातों को ध्यान से सुना और उनके बताए गए तरीके से ही पढ़ाई की. फैकल्टीज ने हर टॉपिक को बेसिक्स से समझाया, जिससे मेरा कॉन्सेप्ट मजबूत हुआ.
"सेल्फ-स्टडी से मिली मदद"
मैं रोज लगभग 6 से 8 घंटे सेल्फ-स्टडी करता था. क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करता था और नियमित रूप से प्रश्नों की प्रैक्टिस करता था. मैं खासकर कमजोर टॉपिक्स पर ज्यादा ध्यान देता था. कभी-कभी दबाव जरूर होता था, लेकिन मैंने उसे मोटिवेशन में बदला. मैं अपने लक्ष्य पर फोकस रखता था और खुद पर विश्वास बनाए रखा. मैं भविष्य में आईआईटी मुंबई की सीएस ब्रांच से बीटेक करना चाहता हूं. परिवार बिहार के गया से है.
"पेरेंट्स का सपोर्ट बहुत काम आया"
कबीर छिल्लर ने जेईई एडवांस में दूसरी रैंक हासिल की है. कबीर पिछले दो साल से कोटा में निजी कोचिंग का का रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट है. पिता मोहित छिल्लर आईआईटीयन हैं. फिलहाल एक निजी कंपनी में सेवारत हैं. कबीर ने 10वीं कक्षा 98 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की थी. कबीर ने बताया कि सही दिशा में मेहनत करना सबसे जरूरी है. इसके लिए फैकल्टीज का सही मार्गदर्शन और पेरेंट्स का सपोर्ट बहुत काम आया.
कबीर छिल्लर ने कहा, मैंने नियमित स्टडी शेड्यूल, लगातार रिवीजन और मॉक टेस्ट के माध्यम से तैयारी को मजबूत किया. एलन में आना मेरे लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. यहां आने के बाद सब्जेक्ट्स में कंसेप्ट्स क्लीयर हुए. रटने की बजाय कॉन्सेप्ट को गहराई से समझने पर जोर दिया. हर टॉपिक को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ा, शॉर्ट नोट्स तैयार किए और रेगुलर रिवीजन किया.
कबीर छिल्लर ने आगे कहा, टाइम मैनेजमेंट और एक्यूरेसी पर भी विशेष काम किया. गलतियों का एनालिसिस करना मेरे लिए काफी महत्वपूर्ण रहा. इससे हर टेस्ट के बाद मेरी परफॉर्मेन्स बेहतर होती चली गई. रीक्रिएशन के लिए दोस्तों के साथ बाहर घूमने चले जाता हूं. मैं आईआईटी मुंबई से सीएस करना चाहता हूं और एमआईटी जाना चाहता हूं.
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