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कौन हैं डॉ. आकांक्षा सिंह? एक ही साल में मिले 3 राष्ट्रीय सम्मान, अब NASI यंग साइंटिस्ट अवार्ड 2026 के लिए चयन

NASI Young Scientist Award 2026 : 2026 में यह उनका तीसरा राष्ट्रीय सम्मान है. उनका शोध फसल सुरक्षा, पौधों की बीमारियों और टिकाऊ खेती पर केंद्रित है.

कौन हैं डॉ. आकांक्षा सिंह? एक ही साल में मिले 3 राष्ट्रीय सम्मान, अब NASI यंग साइंटिस्ट अवार्ड 2026 के लिए चयन
सिंह की रिसर्च इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फसलों में लगने वाली बीमारियां खेती की उत्पादकता और  गुणवत्ता, दोनों पर असर डाल सकती हैं.

CSIR Scientist Akanksha Singh Profile : CSIR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स (CSIR-CIMAP) की साइंटिस्ट डॉ. आकांक्षा सिंह ने फिर कमाल कर दिया है. भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है. उन्हें एग्रीकल्चर और प्लांट साइंसेज में NASI यंग साइंटिस्ट अवार्ड 2026 के लिए चुना गया है. बता दें कि NASI यंग साइंटिस्ट अवार्ड आकांक्षा के लिए साल का तीसरा बड़ा सम्मान है. 

इससे पहले आकांक्षा साल की शुरूआत में इंडियन नेशनल यंग एकेडमी ऑफ साइंसेज (INYAS) की सदस्य बनीं. फिर इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) यंग एसोसिएट के तौर पर भी चुना गया. 

दिसंबर में मिलेगा सम्मान

डॉ. आकांक्षा सिंह को यंग साइंटिस्ट अवार्ड 4 और 5 दिसंबर, 2026 को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में NASI के 96वें सालाना सेशन और सिम्पोजियम के दौरान दिया जाएगा. 

ऐसे में आइए जानते हैं आकांक्षा सिंह कौन हैं और उनकी अचीवमेंट्स...

CSIR साइंटिस्ट आकांक्षा सिंह कौन हैं?

डॉ. आकांक्षा सिंह CSIR-CIMAP में साइंटिस्ट-D हैं. वह संस्थान के क्रॉप प्रोटेक्शन और प्रोडक्शन डिवीजन में काम करती हैं. उन्होंने बॉटनी में PhD की है, जिसका विषय पौधों का स्वास्थ्य और टिकाऊ खेती है.

सिंह की रिसर्च मुख्य रूप से प्लांट-माइक्रोब इंटरैक्शन, फंगल बीमारियों, जैविक फसल सुरक्षा, फंगीसाइड के विकास और पर्यावरण के अनुकूल बीमारी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है.

आकांक्षा सिंह की रिसर्च खेती के लिए क्यों अहम है

सिंह की रिसर्च इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फसलों में लगने वाली बीमारियां खेती की उत्पादकता और णवत्ता, दोनों पर असर डाल सकती हैं. ऐसे में आकांक्षा की रिसर्च  ऐसे वैज्ञानिक तरीकों पर केंद्रित है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना फसलों को बीमारियों को बचा सकती है. इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी. इनकी शोध टिकाऊ खेती को बढ़ावा देती है. 

एक ही साल में उन्हें मिले ये तीन सम्मान, खेती और पर्यावरण की स्थिरता से जुड़ी प्रैक्टिकल चैलेंजेज पर काम कर रहे यंग इंडियन रिसर्चर्स की बढ़ती पहचान को दिखाते हैं. 

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