- IAS दीपक कुमार मिश्र आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कर चुके हैं
- परिवार की ग्रामीण पृष्ठभूमि ने उनके शिक्षण के अंदाज पर गहरा प्रभाव डाला है
- आईआईटी के दौरान जापान की कंपनी का आकर्षक नौकरी प्रस्ताव ठुकराकर सिविल सेवा को चुना
बिहार के एक छोटे से गांव में जन्मे दीपक कुमार मिश्र ने शुरुआती शिक्षा सरकारी स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई की, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की कठिन तैयारी की और आज भारतीय प्रशासनिक सेवा में 2019 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वर्तमान में वे बिहार के रोहतास जिले में जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. 25 सितंबर 2026 को आईएएस दीपक कुमार मिश्र का एक वीडियो वायरल हुआ. वे अकोढ़ीगोला स्थित सरस्वती विद्या निकेतन सह आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे. यहां उन्होंने बच्चों के बीच एक शिक्षक जैसा व्यवहार किया. छात्रों से सवाल-जवाब किए और स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते में जलभराव की समस्या के समाधान का भरोसा भी दिलाया.
दरअसल, रोहतास के जिलाधिकारी दीपक मिश्र का स्कूल में शिक्षक जैसा व्यवहार यूं ही नहीं दिखा. उनकी पृष्ठभूमि भी कुछ ऐसी ही रही है. उनकी खुद की पढ़ाई गांव के स्कूल से हुई है और उनके पिता भी शिक्षक रहे हैं. दीपक ने आईआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में आईएएस बने. फिलहाल वे रोहतास के 50वें जिलाधिकारी के रूप में पदस्थापित हैं. यह पहला अवसर है, जब उन्हें किसी जिले की कमान सौंपी गई है.

चौथी तक गांव के स्कूल में पढ़ाई
दीपक कुमार मिश्र की शुरुआती पढ़ाई सिवान जिले के IAS दीपक कुमार मिश्र सरस्वती विद्या निकेतन सह आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे. सैदपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में हुई. उन्होंने चौथी कक्षा तक की पढ़ाई गांव में ही की. इसके बाद उनकी शिक्षा का सफर दिल्ली और लखनऊ तक पहुंचा. आईसीएसई बोर्ड से दसवीं की परीक्षा में उन्होंने 94.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. इसके बाद सीबीएसई बोर्ड से 12वीं की परीक्षा 88.8 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की. आगे चलकर उन्हें आईआईटी दिल्ली में दाखिला मिला, जहां से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की.
पारिवारिक पृष्ठभूमि का असर
दीपक कुमार मिश्र के पिता हृदयानंद मिश्र सरकारी शिक्षक रहे हैं. वर्ष 2025 में वे सेवानिवृत्त हुए. शिक्षक पिता का प्रभाव दीपक पर स्पष्ट रूप से पड़ा. चूंकि वे बचपन से ही स्कूल और शिक्षा के माहौल से जुड़े रहे, इसलिए पढ़ाने का अंदाज भी उन्हें विरासत में मिला. उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पूरी तरह ग्रामीण रही है. परिवार में तीन भाई और एक बहन हैं. बड़ी बहन की शादी हो चुकी है. छोटे भाइयों में मनीष कुमार भारतीय सेना में मेजर हैं, जबकि दूसरे भाई अनुज कुमार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.

रोहतास डीएम IAS दीपक कुमार मिश्र सरस्वती विद्या निकेतन सह आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे.
जापान की कंपनी का ऑफर ठुकराया
आईआईटी में पढ़ाई के दौरान ही दीपक कुमार मिश्र को जापान की एक कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव मिला था. उन्होंने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उस समय उनकी मां का निधन हो चुका था. परिवार को उनकी जरूरत थी और वे घर के बड़े बेटे थे. इसी कारण उन्होंने जापानी कंपनी का आकर्षक ऑफर ठुकरा दिया. आईआईटी से इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने बीपीसीएल में लगभग एक वर्ष तक काम किया. इसके बाद उन्होंने इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मैकेनिकल इंजीनियर्स में भी करीब एक वर्ष तक सेवाएं दीं.
UPSC में तीसरे प्रयास में मिली सफलता
दीपक कुमार मिश्र ने NDTV को दिए इंटरव्यू में बताया कि पिता की सीमित आय के कारण परिवार आर्थिक दबाव से गुजर रहा था. इसलिए बीपीसीएल और आईआरएसएमई की नौकरियां उनकी मजबूरी थीं. हालांकि उनका वास्तविक लक्ष्य आईएएस बनना था. इसी वजह से उन्होंने नौकरी करते हुए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी. लगातार प्रयासों के बाद तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता मिली. उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 511वीं रैंक हासिल की. वे 2019 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं.
आईएएस के बाद फील्ड से सचिवालय तक का सफर
आईएएस बनने के बाद प्रशिक्षण अवधि में उनकी पोस्टिंग सुपौल में हुई. इसके बाद वे बगहा में एसडीएम रहे. फिर नवादा में डीडीसी और बिहारशरीफ में नगर आयुक्त के पद पर कार्य किया. बिहारशरीफ में नगर प्रशासन की जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव बनाया गया. जून 2026 में उन्हें रोहतास का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया. दीपक मिश्र के प्रशासनिक करियर में फील्ड पोस्टिंग से लेकर राज्य के शीर्ष प्रशासनिक तंत्र तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं.
पहली बार बने जिला कलेक्टर
रोहतास उनकी पहली जिला स्तरीय कमान है. यहां पदस्थापन के बाद वे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और आम लोगों से जुड़ी समस्याओं के समाधान को लेकर व्यक्तिगत रूप से सक्रिय रहे हैं. सावन के दौरान गुप्ताधाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नुकीले पत्थरों वाले हिस्सों में रबर मैट बिछाने की व्यवस्था कर उन्होंने खासा ध्यान आकर्षित किया था. इसके अलावा बिहारशरीफ में नगर आयुक्त रहते हुए राजगीर में आयोजित हॉकी चैंपियनशिप की प्रशासनिक व्यवस्थाओं में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. नवादा में डीडीसी के रूप में भी वे अपने कार्यों के कारण लोकप्रिय रहे. फिलहाल रोहतास के जिलाधिकारी के रूप में वे लगातार चर्चा में हैं.
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