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इन IAS अधिकारियों का ट्रांसफर रोकने के लिए सड़कों पर उतर आए थे लोग, खूब मिला जनता का प्यार

कई अधिकारियों का आए दिन ट्रांसफर होता रहता है. लेकिन कुछ IAS ऑफिसर ऐसे भी हुए, जिनके ट्रांसफर की खबर ने जनता को झकझोर दिया, उन्होंने सड़कों पर उतरकर प्रोटेस्ट किया और अपने चहेते अधिकारियों के ट्रांसफर का विरोध किया.

इन IAS अधिकारियों का ट्रांसफर रोकने के लिए सड़कों पर उतर आए थे लोग, खूब मिला जनता का प्यार
आईएएस अधिकारी मंगेश घिल्डियाल उत्तराखंड कैडर के अफसर हैं और वे उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में जिलाधिकारी के पद पर तैनात थे.

Honest IAS Officers Story: हर साल लाखों की संख्या में एस्पिरेंट्स देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC में शामिल होते हैं. हर किसी का सपना देश का टॉप ऑफिसर बनना होता है. IAS बनना सिर्फ एक पोस्ट पाने का नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में फर्क लाने वाला होता है. आए दिन आप IAS-IPS अफसरों के ट्रांसफर होने की खबरें सुनते होंगे, लेकिन जब कोई अधिकारी यह काम दिल से करता है, तो जनता खुद उसके साथ खड़ी हो जाती है. इतिहास में ऐसे ही कुछ IAS अफसर हुए हैं, जिनके ट्रांसफर की खबर आते ही लोग सड़कों पर उतर आए. आइए जानते हैं उन अधिकारियों के बारे में.

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IAS मंगेश घिल्डियाल के लिए सड़कों पर उतरे लोग

आईएएस अधिकारी मंगेश घिल्डियाल उत्तराखंड कैडर के अफसर हैं और वे उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में जिलाधिकारी के पद पर तैनात थे. टिहरी में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने प्रशासन को जमीन से जोड़कर काम किया, जिससे आम लोगों की समस्याएं सीधे सुनी और सुलझाई गईं. जैसे ही उनके ट्रांसफर की खबर सामने आई, वैसे ही टिहरी और आसपास के इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए. जनता का कहना था कि मंगेश घिल्डियाल ने ईमानदारी, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ काम करते हुए लोगों का भरोसा जीता है, इसी वजह से उनके तबादले को रोकने के लिए लोगों ने खुलकर विरोध जताया और उन्हें भरपूर जनसमर्थन मिला.

जब 39 दिन में जनता के हीरो बन गए IAS विजय किरण आनंद

मई 2016 की बात है. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में उस दिन हालात बिल्कुल अलग थे. कारण था जिले के जिलाधिकारी विजय किरण आनंद का ट्रांसफर. 2008 बैच के इस IAS अफसर ने सिर्फ 39 दिनों में ऐसा काम कर दिखाया कि पूरा जिला उनके साथ खड़ा हो गया. इस अफसर ने खुले में शौच पर सख्ती, राशन की कालाबाजारी पर रोक, नगर पालिका में बड़े घोटालों की जांच जैसे कई कदम उठाए. उन्होंने ताकतवर लोगों से टकराने में भी कोई डर नहीं दिखाया. यही वजह थी कि जैसे ही उनके तबादले की खबर आई, लोग भड़क उठे.

कलेक्ट्रेट घिरा, गाड़ी के आगे लेट गए लोग

डीएम की विदाई के दिन हजारों लोग कलेक्ट्रेट पहुंच गए. हालात ऐसे बने कि पुलिस के लिए भी संभालना मुश्किल हो गया. कुछ लोग उनकी गाड़ी के सामने लेट गए, कुछ रोते नजर आए. लोगों का बस एक ही कहना था, 'ऐसे ईमानदार अफसर को हम जाने नहीं देंगे.' आखिर में खुद जिलाधिकारी को हाथ जोड़कर लोगों से रास्ता देने की अपील करनी पड़ी. जाते-जाते उन्होंने कहा, 'मैं जहां भी रहूंगा, जनता के लिए ही काम करूंगा.'

जब ट्रेनी IAS के लिए उठ खड़ी हुई पूरी तहसील

ऐसी ही एक और मिसाल दिसंबर 2017 में इलाहाबाद (प्रयागराज) में देखने को मिली. करछना तहसील में तैनात SDM ट्रेनी IAS राजा गणपति आर का ट्रांसफर हुआ. खबर फैलते ही यमुनापार इलाके की जनता सड़कों पर उतर आई. राजा गणपति 2015 बैच के IAS अधिकारी हैं. पहले ही अटेम्प्ट में UPSC क्लियर किया. MBBS डॉक्टर भी रह चुके हैं. राजा गणपति ने करछना में पोस्टिंग के दौरान अवैध खनन पर कार्रवाई की, जमीन घोटालों का खुलासा किया, पान-गुटखा थूकने के खिलाफ सख्त अभियान चलाया. जब उनके ट्रांसफर की खबर आई, तो जनता नाराज हो गई. आखिरकार उनका ट्रांसफर ऑर्डर वापस लेना पड़ा. 

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