Hing kaise banti hai: हींग (Asafoetida) ऐसा मसाल है, जो भारत की लगभग हर रसोई में इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह किसी फैक्ट्री में नहीं बनाया जाती, बल्कि एक पौधे के रस से मिलती है. जानें हींग कैसे तैयार की जाती है.
किस पौधे से बनती है हींग
हींग फेरूला (Ferula) नामक पौधे की जड़ों और तने से निकलने वाले दूधिया रस (Latex) से बनाई जाती है. यह पौधा मुख्य रूप से ईरान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और मध्य एशिया के शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है.
हींग बनाने की प्रक्रिया
- फेरूला पौधे को लगभग 4 से 5 साल तक बढ़ने दिया जाता है, ताकि उसकी जड़ें पूरी तरह विकसित हो जाएं.
- जब पौधा परिपक्व हो जाता है, तब उसकी जड़ या तने के निचले हिस्से में चीरा लगाया जाता है.
- कट लगाने पर एक सफेद, चिपचिपा और दूध जैसा रस बाहर निकलता है. यही रस बाद में हींग बनता है.
- इस रस को कई दिनों तक प्राकृतिक रूप से सूखने दिया जाता है. सूखने पर इसका रंग सफेद से बदलकर पीला, फिर लाल-भूरा हो जाता है.
- सूखने के बाद यह गोंद जैसी ठोस सामग्री बन जाती है, जिसे कच्ची हींग कहा जाता है.
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बाजार में मिलने वाली हींग
बाजार में मिलने वाली अधिकांश हींग शुद्ध नहीं होती. कच्ची हींग को गेहूं के आटे, चावल के आटे या गोंद आदि के साथ मिलाकर पाउडर के रूप में तैयार किया जाता है.
हींग की गंध इतनी तेज क्यों होती है
हींग में सल्फर युक्त यौगिक (Sulfur Compounds) पाए जाते हैं, जो इसे तेज और तीखी गंध देते हैं. हालांकि खाना पकने के बाद यही गंध एक सुखद सुगंध और स्वाद में बदल जाती है.
हींग के बारे में रोचक तथ्य
- हींग को अंग्रेजी में Asafoetida कहा जाता है.
- प्राचीन काल से इसका उपयोग मसाले और औषधि दोनों रूपों में किया जाता रहा है.
- भारत दुनिया में हींग का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन अधिकांश कच्ची हींग ईरान और अफगानिस्तान से आयात की जाती है.
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