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भारतीय छात्रों में जर्मनी का क्रेज, 6 महीने में 370% बढ़े आवेदन; AI और टेक कोर्स पहली पसंद

Study In Germany: 'लीप स्कॉलर' की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय छात्र लगातार जर्मनी में पढ़ाई के लिए आवेदन कर रहे हैं. सबसे ज्यादा दिलचस्पी टेक और एआई कोर्सेस के लिए दिखाई जा रही है.

भारतीय छात्रों में जर्मनी का क्रेज, 6 महीने में 370% बढ़े आवेदन; AI और टेक कोर्स पहली पसंद
जर्मनी में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों की दिलचस्पी

पिछले साल के मुकाबले जर्मनी जाने वाले छात्रों की संख्या में भारी उछाल देखा गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से जून के बीच जर्मनी में पढ़ाई के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 370 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा से जुड़े कोर्स में छात्रों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है. विदेश में पढ़ाई कराने वाले प्लेटफॉर्म 'लीप स्कॉलर' (Leap Scholar) की यह रिपोर्ट जनवरी से जून 2026 के बीच 1,24,000 से अधिक भारतीय छात्रों के डेटा पर आधारित है. 

जर्मनी को ही क्यों पसंद कर रहे छात्र?

इस डेटा में यूनिवर्सिटी के एडमिशन फॉर्म, कोर्स से जुड़ी पूछताछ और काउंसलिंग सेशन शामिल हैं. इसके अलावा रिपोर्ट में जर्मनी की सरकारी एजेंसियों और लिंक्डइन (LinkedIn) जैसी वेबसाइटों के आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया गया है. रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय छात्र अब जर्मनी को सिर्फ एक सस्ती पढ़ाई वाली जगह के रूप में नहीं देख रहे हैं, बल्कि सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं. 

छात्र सरकारी यूनिवर्सिटीज की कम फीस, एआई और टेक्नोलॉजी वाले कोर्स की डिमांड, पढ़ाई के बाद काम करने के मौके, वीजा के नियम, भाषा की तैयारी और भविष्य में मिलने वाली सैलरी जैसी चीजों को देखकर जर्मनी चुन रहे हैं.

सबसे ज्यादा इस कोर्स के लिए दिलचस्पी

रिपोर्ट में बताया गया है कि, एमएससी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (MSc AI) कोर्स के लिए छात्रों की दिलचस्पी में 600 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है. 2026 के शुरुआती छह महीनों में जर्मनी के लिए कुल आवेदनों में से 82 प्रतिशत पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) कोर्स के लिए थे. इसके अलावा जर्मनी के बारे में तमाम जानकारी जुटाने के मामले भी 72 प्रतिशत बढ़ गए हैं. 

पढ़ाई के साथ नौकरी का भी मौका

ये रिपोर्ट उस वक्त सामने आई है, जब जर्मनी में नौकरी करने वाले लोगों की भारी कमी है. साल 2026 की शुरुआत में जर्मनी की सरकारी एजेंसी ने करीब 6.3 लाख खाली नौकरियों की जानकारी दी थी, जिनमें सबसे ज्यादा मांग टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर के क्षेत्र में है. यही वजह है कि भारतीय छात्रों के लिए ये पढ़ाई के साथ-साथ वहां नौकरी का एक बेहतरीन मौका बन रहा है. यहां यूनिवर्सिटीज की फीस भी कम है और कोर्स पूरा करने के बाद जॉब-सीकर वीजा, EU ब्लू कार्ड और नया अपॉर्चुनिटी कार्डजैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं.

जागरूक हो चुके हैं भारतीय छात्र

इसे लेकर लीप स्कॉलर के को-फाउंडर अर्णव कुमार ने कहा, "जर्मनी अब भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई से लेकर नौकरी पाने का एक सीधा रास्ता बनता जा रहा है. बड़ा बदलाव यह नहीं है कि ज्यादा छात्र जर्मनी जा रहे हैं, बल्कि यह है कि वे इसे कैसे चुन रहे हैं. वे पैसे की वसूली (ROI), जॉब मार्केट, भाषा की तैयारी, वीजा के नियमों और लंबे समय के करियर को देखकर फैसला ले रहे हैं. इससे पता चलता है कि भारतीय छात्र अब ज्यादा जागरूक हो गए हैं."

रिपोर्ट में बताया गया कि कंप्यूटर साइंस में 273 प्रतिशत छात्रों की दिलचस्पी बढ़ी है, जबकि डेटा साइंस और एआई के मिले-जुले कोर्स में 173 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इसके उलट, एमबीए (MBA) करने की इच्छा में 13 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे साफ है कि छात्र अब तकनीकी और नौकरी दिलाने वाले कोर्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

एडमिशन मिलना आसान नहीं 

भले ही भारतीय छात्र जर्मनी में पढ़ाई के लिए दिलचस्पी दिखा रहे हों, लेकिन यहां एडमिशन मिलना अभी भी काफी मुश्किल है. रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती छह महीनों में आवेदन करने वाले छात्रों में से केवल 12 प्रतिशत को ही यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल पाया. इसका मतलब है कि छात्रों को सही कोर्स चुनने, अच्छे डॉक्यूमेंट्स तैयार करने और समय से पहले तैयारी शुरू करने की जरूरत है. 

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