देशभर में परीक्षाओं और एजुकेशन सिस्टम को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के अधिकारियों के साथ बैठक की. इस दौरान शिक्षा मंत्री ने बोर्ड के कामकाज, आने वाली परीक्षाओं और न्यू एजुकेशन पॉलिसी समेत बाकी चीजों की समीक्षा की. अधिकारियों के साथ इस बैठक में परीक्षाओं के दौरान पूरी निष्पक्षता और ट्रांसपेरेंसी पर जोर दिया गया, जिससे लाखों छात्रों के साथ उनके पेरेंट्स का भरोसा भी बना रहे. शिक्षा मंत्री ने इस दौरान अधिकारियों से कहा कि कोई भी पॉलिसी बनाते समय सबसे पहले छात्रों के हितों और उनकी सहूलियत का ध्यान रखना जरूरी है.
नई शिक्षा नीति के तहत कामकाज
देशभर के तमाम स्कूलों में नई शिक्षा नीति के तहत होने वाले बदलावों और प्रोग्रेस को लेकर भी इस बैठक में विस्तृत चर्चा की गई. साथ ही बोर्ड की कार्यप्रणाली को और ज्यादा कुशल और सुगम बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल समाधानों के इस्तेमाल पर चर्चा हुई, जिससे रिजल्ट जारी करने में कोई भी परेशानी न हो और परीक्षा के दौरान भी किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े.
शिक्षा का स्तर सुधारने पर जोर
शिक्षा मंत्री की इस बैठक में शिक्षा के स्तर को सुधारने और इसके लिए प्रयासों पर भी बात हुई. प्रह्लाद जोशी ने अधिकारियों से कहा कि देशभर के लाखों छात्रों को बेहतर वातावरण दिया जाना जरूरी है और इसके लिए लगातार कोशिश की जानी चाहिए. इसके अलावा उच्च शिक्षा और बाकी चीजों पर भी इस दौरान विस्तार से बातचीत हुई.
Convened a meeting with senior officials of the Department of School Education and Literacy, @EduMinOfIndia, to discuss issues pertaining to CBSE. The meeting reviewed key priorities for strengthening CBSE's academic, examination and administrative processes, with a focus on… pic.twitter.com/3ichAWryzc
— Pralhad Joshi (@JoshiPralhad) August 24, 2026
विवादों में रहा CBSE
पिछले दिनों सीबीएसई को लेकर एक के बाद एक कई विवाद थे, जिन्हें लेकर बोर्ड खूब चर्चा में रहा और सरकार को भी आलोचना झेलनी पड़ी. 12वीं बोर्ड का रिजल्ट जारी होने के बाद ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर गंभीर सवाल उठे, छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी कॉपियां बदल गईं, कुछ कॉपियों में स्कैनिंग काफी ब्लर थी और नंबरों की गड़बड़ी के चलते बोर्ड को किरकिरी झेलनी पड़ी. इसके बाद थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर भी विवाद हुआ.
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