DU Hindi PhD New Schedule: दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में पीएचडी दाखिले को लेकर उठे विवाद के बीच विश्वविद्यालय ने इंटरव्यू का नोटिफिकेशन वापस ले लिया है. 27 अक्टूबर की शाम जारी नोटिफिकेशन में अगले ही दिन सुबह से इंटरव्यू निर्धारित किए गए थे. छात्रों की आपत्तियों और विरोध के बाद विभाग ने 28, 29, 30 और 31 अक्टूबर तथा 2 नवंबर 2026 को होने वाले सभी इंटरव्यू अगले आदेश तक रद्द कर दिए हैं. हालांकि, नोटिस में इंटरव्यू रद्द करने की वजह नहीं बताई गई है.
नए नोटिफिकेशन में क्या बदलेगा?इंटरव्यू रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नए नोटिफिकेशन में ज्यादा अभ्यर्थियों को मौका दिया जाएगा? क्या आवेदन करने वाले सभी योग्य उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा? फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से नई तारीखों या अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि फिलहाल केवल इंटरव्यू रद्द किए गए हैं, पीएचडी दाखिले की पूरी प्रक्रिया नहीं.
ABVP ने क्या कहा?इस मामले पर ABVP दिल्ली विश्वविद्यालय के सचिव अक्षय प्रताप सिंह ने NDTV से कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर डटा रहेगा और किसी भी तरह के पक्षपात को बर्दाश्त नहीं करेगा. ABVP की प्रमुख मांग है कि आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों को इंटरव्यू का अवसर मिले, NET और पीएचडी पात्रता प्राप्त उम्मीदवारों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए और अभ्यर्थियों की सूची जारी होने और इंटरव्यू के बीच पर्याप्त समय दिया जाए.

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने 27 अक्टूबर की शाम PHD प्रवेश के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था. इसमें अभ्यर्थियों को 28 अक्टूबर की सुबह 9:15 बजे रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था. छात्रों ने इतने कम समय में इंटरव्यू आयोजित करने पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि दूसरे राज्यों से आने वाले उम्मीदवारों को दिल्ली पहुंचने और तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला.
ABVP और DUSU ने यह भी आरोप लगाया कि NET और ‘Only for PhD' श्रेणी के कई अभ्यर्थियों को उचित अवसर नहीं दिया गया. 150 से अधिक सीटें होने के बावजूद सीमित संख्या में छात्रों को इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने पर भी सवाल उठे. इसके बाद विभाग के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया.
फैसला लेने वालों की जवाबदेही कौन तय करेगा?नोटिफिकेशन वापस लेना छात्रों की आपत्तियों के बीच एक अहम घटनाक्रम है, लेकिन इससे कई सवालों के जवाब नहीं मिल रहे. इतनी महत्वपूर्ण प्रवेश प्रक्रिया का नोटिफिकेशन जारी करने से पहले पर्याप्त समय देने पर विचार क्यों नहीं किया गया? इस फैसले की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में किसी अधिकारी से जवाब मांगा है?
नोटिफिकेशन वापस ले लिया गया है, लेकिन अब सबकी नजर नए नोटिफिकेशन पर है. क्या इस बार अधिक छात्रों को इंटरव्यू का मौका मिलेगा और क्या पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ेगी?
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