अगर आपको इतिहास से लगाव है और आप दिल्ली की पुरानी इमारतों, संस्कृति और दबे हुए इतिहास को करीब से जानना चाहते हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन मौका है. दिल्ली के हजारों साल पुराने इतिहास और सभ्यताओं पर वैज्ञानिक तरीके से रिसर्च करने और उनके डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए सरकार आपको पैसे देगी. दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने इसके लिए दो खास फेलोशिप योजनाओं को मंजूरी दे दी है. इनका नाम ‘अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप' (Archives Research Fellowship) और ‘पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप' (Archaeology Research Fellowship) है.
इस योजना को हरी झंडी देते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली केवल देश की राजधानी ही नहीं, बल्कि हजारों वर्षों के इतिहास, संस्कृति और सभ्यता की जीवंत धरोहर भी है. इस अमूल्य विरासत का संरक्षण, उसका वैज्ञानिक अध्ययन, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और नई पीढ़ी तक उसकी पहुंच सुनिश्चित करना दिल्ली सरकार की प्राथमिकता है.
किन लोगों को मिलेगा मौका?
यह योजना शोधकर्ताओं, अभिलेख विशेषज्ञों, संरक्षण विशेषज्ञों, इतिहासकारों, भाषाविदों और विरासत विशेषज्ञों को दिल्ली से जुड़े इतिहास और अभिलेख विज्ञान के विभिन्न विषयों पर विशेष अध्ययन के लिए एक संस्थागत मंच उपलब्ध कराएगी.
क्या करना होगा काम?
इस फेलोशिप के तहत रिकॉर्ड प्रबंधन, अभिलेखीय सामग्री के संरक्षण व परिरक्षण, रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, सूचना व डेटा के प्रसार, माइक्रो-फिल्मिंग एवं रिप्रोग्राफी, शोध एवं प्रकाशन तथा विशेष रूप से उर्दू और फारसी जैसी प्राच्य भाषाओं से जुड़े विषयों पर काम करना होगा.
कितने पैसे और कितने समय के लिए मिलेगी मदद?
इस योजना के तहत हर साल कुल 15 शोधकर्ताओं को चुना जाएगा. इन्हें एक साल की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा. इस दौरान उन्हें उनके काम और योग्यता के आधार पर हर महीने 25,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की फेलोशिप राशि दी जाएगी.
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