दीवारों और छतों में दरारें, खराब टॉयलेट और टीन की अस्थायी छत...ये हाल है दिल्ली के सरकारी स्कूलों का, जहां ऐसी खतरनाक स्थिति वाले स्कूलों में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. दिल्ली सरकार ने 108 स्कूल बिल्डिंग्स को असुरक्षित या खतरनाक माना है. इन इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट शुरू किया है. स्ट्रक्चरल ऑडिट की मदद से ये पता लगाया जाएगी कि क्या मरम्मत को आंशिक रूप से तोड़ने या पूरी तरह से दोबारा बनाने की जरूरत है कि नहीं. इसका आकलन किया जाएगा. स्ट्रक्चरल ऑडिट के तहत 54 बिल्डिंग्स की हालत बहुत खराब पाई गई है. सात बिल्डिंग्स को तोड़ने की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है और संभावना है कि आने वाले महीनों में उन्हें गिरा दिया जाएगा.
कितनी पुरानी हैं इमारतें
अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इमारतों में से कुछ 30 से 40 साल पहले बनी थीं. समय के साथ उनकी हालत खराब हो गई है. कुछ स्कूलों में छात्र टीन की छतों के नीचे क्लास ले रहे हैं. जबकि दीवारों और छतों में दरारें आ गई हैं, कुछ स्कूलों में टॉयलेट और वॉशरूम की हालत भी खराब है. ठीक से खिड़कियां या दरवाजे नहीं हैं.
हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस मामले पर चर्चा हुई. उन्होंने शिक्षा विभाग और लोक निर्माण विभाग को स्ट्रक्चरल ऑडिट में तेजी लाने और असुरक्षित ढांचों को समय पर हटाने का निर्देश दिया. अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के रूप नगर के एक स्कूल के निरीक्षण में पीने के पानी, साफ-सफाई और आग से सुरक्षा के इंतजांमों में कमियां पाए गई थी. जिसके बाद सीएम रेखा गुप्ता ने सरकारी स्कूलों का ऑडिट का आदेश दिया था.
सात इमारतों को गिराने की मंजूरी मिली
जिन सात इमारतों को गिराने की मंजूरी मिली है, उनमें चिल्ला गांव का CM SHRI स्कूल, जसोला गांव का सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कराला का सर्वोदय कन्या विद्यालय और बाप्रोला का सरकारी बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं. इस लिस्ट में मटियाला का सर्वोदय कन्या विद्यालय और नेब सराय और शिवाजी पार्क के सरकारी गर्ल्स स्कूल भी शामिल हैं. प्रस्तावों को अधिकारी से मंजूरी मिल गई है. सभी तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़ी जरूरतें पूरी होने के बाद इन इमारतों को गिरा दिया जाएगा.
अधिकारियों के अनुसार, स्ट्रक्चरल ऑडिट से पहले जॉइंट इंस्पेक्शन के लिए 54 तोड़ने के प्रस्ताव प्रोसेस में हैं या जमा किए जा रहे हैं. 14 अन्य प्रस्तावों को स्ट्रक्चरल ऑडिट के लिए मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद PWD उन हिस्सों की पहचान करेगा. अपनी सर्वे रिपोर्ट जमा करेगा. जिन्हें तोड़े जाने की जरूरत हो सकती है.
सात प्रस्तावों को पहले ही डिमोलिशन की मंजूरी मिल चुकी है. सार्वजनिक रूप से बताई गई कैटेगरी में सभी 108 इमारतों की अंतिम स्थिति शामिल नहीं है. बाकी इमारतों में मरम्मत, रेट्रोफिटिंग, आंशिक रूप से तोड़ने या और तकनीकी जांच की जरूरत हो सकती है.
PWD इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट करेगा
सिर्फ शुरुआती जांच के आधार पर किसी भी स्कूल की इमारत को नहीं गिराया जाएगा. PWD इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट करेगा, इमारत के असुरक्षित या खतरनाक हिस्सों की पहचान करेगा और लागत का अनुमान तैयार करेगा. अधिकारियों ने कहा कि जरूरी तकनीकी सिफारिशें और कानूनी मंजूरी मिलने के बाद ही इमारत को गिराने का काम शुरू किया जाएगा.
छात्रों को किया जाएगा आसपास के स्कूलों में शिफ्ट
छात्रों को कुछ समय के लिए आसपास के स्कूलों में शिफ्ट किया जा सकता है. इमारतों को गिराने का काम एक-एक ब्लॉक करके या स्कूल के समय के बाद भी किया जा सकता है. अधिकारियों ने कहा कि इस चरणबद्ध तरीके से सरकार सबसे खतरनाक इमारतों को प्राथमिकता दे पाएगी.
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