CBSE Re-Checking Process 2026: सीबीएसई बोर्ड के रिजल्ट और नंबरों से नाखुश करीब 4 लाख छात्र अपनी कॉपियों की री-चेकिंग करवा रहे हैं. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक, करीब 12 लाख स्कैन कॉपियां मांगी गई हैं. अगर आप भी अपनी कॉपी दोबारा चेक कराने जा रहे हैं, तो रुकिए. जल्दबाजी में लिया गया फैसला फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है और री-वैल्यूएशन में नंबर बढ़ने की बजाय घट भी सकते हैं. यही वजह है कि आवेदन करने से पहले एक जरूरी कदम उठाना बेहद जरूरी माना जा रहा है. जानिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
स्कैन कॉपी सबसे पहले एक्सपर्ट से दिखाएं
अगर आपको लगता है कि आपकी कॉपी में नंबर कम आए हैं, तो सबसे पहले अपनी स्कैन की गई आंसर-शीट डाउनलोड करें और उसे किसी एक्सपीरिएंस्ड टीचर या सब्जेक्ट एक्सपर्ट को जरूर दिखाएं. कई बार छात्र जिन आंसरों को पूरी तरह सही मानते हैं, वे CBSE की मार्किंग स्कीम के अनुसार पूरे नंबर के योग्य नहीं होते. वहीं दूसरी तरफ कुछ मामलों में स्टेप मार्किंग, टोटलिंग या प्रश्न छूट जाने जैसी गलतियां भी मिल सकती हैं. ऐसे में एक्सपर्ट की राय आपको सही फैसला लेने में मदद कर सकती है. इसे लेकर कई कोचिंग सेंटर्स ने बच्चों की मदद के लिए एक्सपर्ट्स भी बैठाए हैं. जहां से आप उनकी हेल्प ले सकते हैं.
नंबर बढ़ भी सकते हैं और घट भी
CBSE की री-वैल्यूएशन प्रक्रिया में सिर्फ नंबर बढ़ने की गारंटी नहीं होती है. अगर दोबारा जांच के दौरान बोर्ड को लगता है कि पहले ज्यादा नंबर दिए गए थे, तो मार्क्स कम भी हो सकते हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि नया रिजल्ट ही फाइनल माना जाता है. अगर एक नंबर भी कम होता है तो वही मार्क्स आपकी अपडेटेड मार्कशीट में होंगे. इसलिए बिना जांचे-परखे आवेदन करना जोखिम भरा हो सकता है.
सीधे री-वैल्यूएशन नहीं कर सकते
कई छात्र यह गलती कर बैठते हैं कि वे सीधे री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन करना चाहते हैं. लेकिन CBSE की प्रक्रिया अलग है. पूरा प्रोसेस कई फेज में चलता है. सबसे पहले नंबर्स का वेरिफिकेशन, फिर आंसर शीट ली जाती है. उसके बाद चुनिंदा प्रश्नों का री-वैल्यूएशन होता है. इन तीनों चरणों को क्रम से पूरा करना जरूरी है. किसी एक स्टेप को छोड़कर अगले चरण में नहीं जा सकते हैं.
इन गलतियों की शिकायत कर सकते हैं छात्र
- कोई पेज गायब होना
- सप्लीमेंट्री शीट अपलोड न होना
- ग्राफ या मैप स्कैन न होना
- धुंधली कॉपी दिखाई देना
- गलत उत्तर पुस्तिका अपलोड होना
- आंसर चेक किए बिना छोड़ दिया जाना
ऑनलाइन पढ़ाने वाले टीचर्स भी दे रहे ऑफर
सीबीएसई के इस विवाद के बीच कई कोचिंग चलाने वाले टीचर्स ने सोशल मीडिया पर कॉपी चेकिंग का काम शुरू कर दिया है. इसके लिए वो छात्रों से कुछ पैसा चार्ज कर रहे हैं और सटीक जानकारी दे रहे हैं कि उनकी कॉपी में कितने नंबर कम या ज्यादा हैं. हालांकि यही बात आपके स्कूल के टीचर भी आपको बखूबी बता सकते हैं, ऐसे में एक बार उन्हें अपनी कॉपी जरूर दिखा लें.
CBSE COPY CHECKING OSM KI VAJAH SE BIGAD GAYA BACHHON KA FUTURE #CbseCopyChecking #OSM pic.twitter.com/vUA4bB5Xoq
— Anurag Tyagi (@TheAnuragTyagi) May 28, 2026
री-वैल्यूएशन कब तक, कितना देना होगा शुल्क?
CBSE ने री-वैल्यूएशन और वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल 2 जून से शुरू कर दिया है. छात्र 6 जून 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. इसके बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. CBSE ने अलग-अलग फेज के लिए अलग फीस तय किया है. आंसर शीट में टेक्निकल फॉल्ट के लिए 100 रुपए प्रति कॉपी और री-वैल्यूएशन 25 रुपए प्रति क्वेश्चन है. ध्यान रखें कि एक बार जमा किया गया शुल्क वापस नहीं किया जाएगा. इसलिए आवेदन करने से पहले पूरी तरह चेक करना जरूरी है.
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