असफलता एक-दो बार मिले तो हौसला टूट सकता है, लेकिन लगातार 10 बार नाकामी के बाद भी लक्ष्य पर टिके रहना आसान नहीं होता. बिहार के नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के डोहरा गांव निवासी विजेता विशाल ने ऐसा ही कर दिखाया है. SSB इंटरव्यू में लगातार 10 बार असफल होने के बावजूद उन्होंने कोशिश नहीं छोड़ी. 11वें प्रयास में सफलता हासिल की और अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं. उनकी ये सक्सेस स्टोरी काफी कमाल की है और उन लोगों को एक बड़ा मैसेज देती है, जो फेल होने के बाद निराश होकर बैठ जाते हैं.
सालों की मेहनत के बाद कंधे पर लगे सितारे
विजेता ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा पास की. इसके बाद चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में कठिन प्रशिक्षण पूरा किया. ट्रेनिंग के बाद आयोजित पासिंग आउट परेड में जब उनके कंधों पर अधिकारी के सितारे सजे तो वर्षों की मेहनत और इंतजार का सपना पूरा हो गया.
10 बार SSB में फेल, फिर भी नहीं मानी हार
विजेता की सफलता की कहानी इसलिए खास है, क्योंकि उन्हें SSB इंटरव्यू में लगातार 10 बार असफलता मिली. हर बार नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया, लेकिन उन्होंने इसे अपने लक्ष्य से पीछे हटने की वजह नहीं बनने दिया. हर असफल प्रयास के बाद उन्होंने अपनी कमियों को समझने और उन्हें दूर करने पर ध्यान दिया. परिवार के सहयोग और पिता के अनुशासित मार्गदर्शन ने भी उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. आखिरकार 11वें प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई.
पिता खुद सेना में, बेटे को अधिकारी बनाने का देखा सपना
विजेता के पिता धनंजय कुमार धीरज भारतीय सेना की बिहार रेजीमेंट की सातवीं बटालियन में नायब सूबेदार के पद पर रहे हैं. उनका सपना सेना में अधिकारी बनने का था, लेकिन वे जेसीओ के पद तक ही पहुंच सके. इसके बाद उन्होंने बेटे को सेना में अधिकारी बनाने का सपना देखा. विजेता ने भी पिता की इस इच्छा को अपना लक्ष्य बनाया. पिता ने उन्हें अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ तैयारी करने के लिए प्रेरित किया. विजेता ने सैनिक स्कूल नालंदा से पढ़ाई की और दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. इसके बाद सेना में अधिकारी बनने की तैयारी में जुट गए.
चेन्नई OTA की पासिंग आउट परेड में भावुक पल
विजेता की सफलता का सबसे भावुक पल चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) की पासिंग आउट परेड के दौरान आया. अधिकारी की वर्दी में बेटे को देखकर पिता धनंजय कुमार धीरज के लिए ये गर्व का क्षण था. सैन्य प्रोटोकॉल के तहत नायब सूबेदार रहे पिता ने अपने अधिकारी बेटे को सलामी दी. पिता की सलामी स्वीकार करने के बाद विजेता ने झुककर उनके चरण स्पर्श किए और आशीर्वाद लिया.
पिता का अधूरा सपना, बेटे ने किया पूरा
धनंजय कुमार धीरज खुद सेना में अधिकारी बनना चाहते थे, लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका. हालांकि उन्होंने बेटे के लिए वही सपना देखा और उसे पूरा करने में लगातार उसका मार्गदर्शन किया. विजेता ने भी पिता की उम्मीद को अपनी मेहनत से जवाब दिया. 10 बार SSB में असफल होने के बाद भी उन्होंने लक्ष्य नहीं छोड़ा और 11वें प्रयास में सफलता हासिल कर ली.
विजेता विशाल की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो लगातार असफलताओं के बाद अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं. लेकिन विजेता ने साबित किया कि असफलता मंजिल नहीं होती. अपनी कमियों को चिन्हित कर उसे सुधारते हुए प्रयास किया जाए तो सफलता दूर नही रह जाती है.
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