बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 4 हजार से अधिक पद खाली हैं. प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित पटना विश्वविद्यालय में 903 में से 501 पद खाली हैं. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में 703 पद में से 304 खाली हैं. दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में 1717 पद में से 743 पद रिक्त हैं. वीर कुंवर सिंह आरा विश्वविद्यालय में 969 पद में से 480 पद रिक्त हैं. दूसरे विश्वविद्यालयों की भी यही स्थिति है. इसकी वजह से विद्यार्थियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. विद्यार्थी बताते हैं कि वे सिर्फ एटेंडेंस के लिए यूनिवर्सिटी आ रहे हैं क्योंकि क्लास में टीचर्स हैं नहीं.
बिहार में अब नए नियमों से होगी बहाली
बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली के लिए नए नियम बनाये जा रहे. लोकभवन ने बहाली के लिए नया ड्राफ्ट जारी किया है और विश्वविद्यालयों से सुझाव मांगे हैं. नए नियमों के मुताबिक बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति से पहले अब स्टेट लेवल एलिजिबिलिटी टेस्ट पास करना होगा. इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थी ही आगे असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे. यह परीक्षा नेट के तर्ज पर होगी. दो मार्च को लोक भवन ने यह ड्राफ्ट जारी कर सभी विश्वविद्यालयों से सुझाव मांगे हैं.
गेस्ट फैकल्टी के भरोसे चल रहा विश्वविद्यालय
पटना विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर नमिता सिंह ने बताया कि अभी आधे से अधिक पद खाली हैं. हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द बहाली हो जाए. अपनी डिमांड हमने भेजी है. तब तक सभी डिपार्टमेंट में जरूरत के हिसाब से गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं ली जा रही हैं. पटना विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के 637 पद हैं, एसोसिएट प्रोफेसर के 186 पद हैं और प्रोफेसर के 70 और प्रिंसिपल के 10 पद हैं. इनमें सिर्फ 402 ही कार्यरत हैं. बाकी 501 पोस्ट खाली हैं.
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