
विराट कोहली को पहली पारी में मिचेल स्टार्क, तो दूसरी में ओकीफी ने आउट किया...
नई दिल्ली:
शर्मनाक हार... टीम इंडिया की पुणे टेस्ट में हुई हार को इन्हीं शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है. क्रिकेट के जानकारों को यह शब्द चुभ सकते हैं. यह भी कहा जा सकता है कि एक टेस्ट हारते ही मीडिया, टीम इंडिया के प्रति बहुत ज्यादा आलोचनात्मक हो गया है, लेकिन टीम इंडिया की हार को व्यक्त करने के लिए शायद यही मुफीद शब्द हैं. इस मैच में तीन दिनों में ही फैसला हो गया. टीम इंडिया के लिहाज से बात करें तो दोनों पारियों में कुल मिलाकर उसके बल्लेबाज 75 ओवर भी नहीं खेल पाए. पहली पारी में टीम इंडिया के नामी बल्लेबाजों ने 40.1 ओवर्स में लेग स्पिनर स्टीव ओकीफी के आगे हथियार डाल दिए वहीं दूसरी पारी में तो इतने भी ओवर नहीं खेल पाए. दूसरी पारी में भारतीय टीम केवल 33.5 ओवर तक ही विकेट पर टिक पाई और 31 रन बनाने वाले चेतेश्वर पुजारा टॉप स्कोरर रहे.
सीरीज शुरू होने के पहले इसमें टीम इंडिया की जीत के अंतर को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जा रही थीं. कोई पूर्व क्रिकेटर टीम इंडिया के पक्ष में 4-0 की जीत बता रहा था तो कोई यह अंतर 3-1 मान रहा था. बहरहाल, यह निश्चित हैं कि ऑस्ट्रेलिया की ओर दर्ज की गई इस 'आंखें खोल देने वाली जीत' के बाद ये आवाजें उठनी बंद हो जाएंगी. टीम इंडिया ने पुणे में स्पिन का मददगार ट्रैक बनाकर कंगारुओं को फांसने के लिए जो जाल बुना था, उसमें भारतीय बल्लेबाज ही फंस गए. पहले दिन से ही कोई गेंद जंप कर रही थी तो कोई नीची रह रही थी. ऐसे में यह तो लग रहा था कि मैच पांच दिन से पहले खत्म हो जाएगा. लेकिन यह उम्मीद किसी ने नहीं की थी कि मैच तीन दिन में ही निपट जाएगा और हारने वाली टीम, विराट कोहली की टीम इंडिया होगी. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव स्मिथ ने जिस अंदाज में अपनी रणनीति तैयार की और अनुभवहीन खिलाड़ियों का इस्तेमाल किया, उसकी जितनी तारीफ की जाएकम है.
दबाव अब शिफ्ट होकर टीम इंडिया पर आ गया है. भारत के लिहाज से इस मैच में धक्का पहुंचाने वाली बात यह रही कि कप्तान विराट कोहली दोनों पारियों में नहीं चले. पहली पारी में वे शून्य और दूसरी में 13 रन पर आउट हुए. विराट जितने लंबे समय से भारतीय बल्लेबाजी की चुनौती की अगुवाई कर रहे थे, उसे लिहाज से उनके लिए यह दौर इस मैच में नहीं तो अगले किन्ही मैच में आना था. दरअसल होना यह था कि विराट की इस नाकामी के बीच कोई अन्य बल्लेबाज पारी को संवारने और सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता. यह काम विजय, राहुल, पुजारा अथवा अजिंक्य रहाणे में से कोई कर सकता था. दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ. ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टीम इंडिया के 19 मैच में अपराजेय रहने के क्रम को तोड़ा और उसे ऐसी हार पर मजबूर कर दिया जो लंबे समय तक टीस देती रहेगी....
सीरीज शुरू होने के पहले इसमें टीम इंडिया की जीत के अंतर को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जा रही थीं. कोई पूर्व क्रिकेटर टीम इंडिया के पक्ष में 4-0 की जीत बता रहा था तो कोई यह अंतर 3-1 मान रहा था. बहरहाल, यह निश्चित हैं कि ऑस्ट्रेलिया की ओर दर्ज की गई इस 'आंखें खोल देने वाली जीत' के बाद ये आवाजें उठनी बंद हो जाएंगी. टीम इंडिया ने पुणे में स्पिन का मददगार ट्रैक बनाकर कंगारुओं को फांसने के लिए जो जाल बुना था, उसमें भारतीय बल्लेबाज ही फंस गए. पहले दिन से ही कोई गेंद जंप कर रही थी तो कोई नीची रह रही थी. ऐसे में यह तो लग रहा था कि मैच पांच दिन से पहले खत्म हो जाएगा. लेकिन यह उम्मीद किसी ने नहीं की थी कि मैच तीन दिन में ही निपट जाएगा और हारने वाली टीम, विराट कोहली की टीम इंडिया होगी. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव स्मिथ ने जिस अंदाज में अपनी रणनीति तैयार की और अनुभवहीन खिलाड़ियों का इस्तेमाल किया, उसकी जितनी तारीफ की जाएकम है.
दबाव अब शिफ्ट होकर टीम इंडिया पर आ गया है. भारत के लिहाज से इस मैच में धक्का पहुंचाने वाली बात यह रही कि कप्तान विराट कोहली दोनों पारियों में नहीं चले. पहली पारी में वे शून्य और दूसरी में 13 रन पर आउट हुए. विराट जितने लंबे समय से भारतीय बल्लेबाजी की चुनौती की अगुवाई कर रहे थे, उसे लिहाज से उनके लिए यह दौर इस मैच में नहीं तो अगले किन्ही मैच में आना था. दरअसल होना यह था कि विराट की इस नाकामी के बीच कोई अन्य बल्लेबाज पारी को संवारने और सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता. यह काम विजय, राहुल, पुजारा अथवा अजिंक्य रहाणे में से कोई कर सकता था. दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ. ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टीम इंडिया के 19 मैच में अपराजेय रहने के क्रम को तोड़ा और उसे ऐसी हार पर मजबूर कर दिया जो लंबे समय तक टीस देती रहेगी....
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