
विराट कोहली की क्पातनी में टीम इंडिया लगातार 6 टेस्ट सीरीज जीत चुकी है (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
टीम इंडिया की पुणे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया से हार वास्तव में इसलिए बड़ी है, क्योंकि वह न केवल घरेलू मैदान पर खेल रही थी, बल्कि लगभग हर चीज उसके अनुरूप ही थी. फिर चाहे मनफाफिक पिच की बात हो या टीम संयोजन की. खुद कप्तान विराट कोहली ने पुणे टेस्ट से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पिच उनकी मांग के अनुरूप है और वह उससे खुश हैं. टीम की बात करें तो यह लगभग वही टीम है जो इससे पहले के 19 टेस्ट मैचों से हारी नहीं थी. खास बात यह कि अजिंक्य रहाणे, लोकेश राहुल और जयंत यादव जैसे चोटिल खिलाड़ी फिट हुए और बड़ी सीरीज़ के लिए तैयार होकर आए. मतलब विराट को अपनी मनपसंद टीम मिली. अब आप सोच रहे होंगे कि टेस्ट में वर्ल्ड नंबर वन टीम इंडिया के लिए जब सबकुछ ओके था, तो फिर कमी कहां रह गई. जाहिर है ऐसे में इस हार पर मंथन करते हुए इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है कि कहीं कुछ बदलाव किए जाने आवश्यक तो नहीं है. हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ही बदलावों के बारे में जो टीम को पटरी पर ला सकते हैं...
बदलाव नंबर 1
पिच रैंक टर्नर नहीं स्पिन फ़्रेंड्ली हो
पुणे में पहले दिन दूसरे ओवर में ही स्पिनर को लगा दिया गया और गेंद ने स्क्वेयर टर्न लेना शुरू कर दिया था. ऐसी रैंक टर्नर पर सही जगह पर गेंदबाज़ी कर विपक्षी टीम हावी हो सकती है. साल 2004 में कंगारू टीम के खिलाफ़ मुंबई टेस्ट, फिर साल 2012 में इंग्लैंड सीरीज़ इसी बात के कुछ उदाहरण हैं. जबकि स्पिन फ़्रेंड्ली पिचों पर जहां बेहतर स्किल्स से विकेट मिलेगा, वहां टीम इंडिया के स्पिनर हावी होंगे, क्योंकि वह ऐसी ही पिचों पर खेलकर बड़े हुए हैं वहां उनसे बेहतर कोई नहीं..
बदलाव नंबर 2
जयंत की जगह कुलदीप
अभ्यास मैच में भारत ए के लिए कुलदीप यादव को नहीं खिलाया गया. बाएं हाथ का यह चाइनामैन गेंदबाज़ न केवल कंगारुओं के लिए बल्कि विश्व क्रिकेट में भी एक अन-नोन एंटिटी (जिसके बारे में कोई अधिक नहीं जानता) है. विश्व में ढूंढने पर भी चाइनामैन गेंदबाज नहीं मिलते हैं. ऐसे में कुलदीप यादव को इस कंगारू टीम के खिलाफ़ टेस्ट किया जा सकता है. जहां हर गेंदबाज़ के खिलाफ़ उनकी तैयारी पूरी हो सकती है. कुलदीप के खिलाफ़ वो फंस सकते हैं.
बदलाव नंबर 3
प्लेइंग XI में हों करुण नायर
तिहरा शतक लगाने के बाद टीम से बाहर होने के उदाहरण ज्यादा नहीं, लेकिन करुण नायर उसमें शुमार हो चुके हैं. नायर नए हैं, टीम में रहने और जगह बनाने का जज्बा है, तिहरे शतक का कॉन्फिडेंस है, ऐसे में उन्हें अंतिम ग्यारह में शामिल करना होगा. कर्नाटक के लिए खेलने वाले करुण से बेहतर बेंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच को कोई और बल्लेबाज़ नहीं जानता.
NDTV से बात करते हुए पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा कि करुण नायर को टीम में शामिल करना ही होगा. यह एक बदलाव ज़रूरी है. फिर चाहे वह जयंत यादव की जगह हो या फिर किसी पेसर को हटाकर उन्हें टीम में लाया जाए. इसका फ़ैसला बेंगलुरू की पिच को देखने के बाद लिया जाना चाहिए लेकिन बदलाव ज़रूरी है
कप्तान विराट ने कहा कि कंगारू टीम तीनों दिन भारत से बेहतर खेली और ऐसा खेलने पर वो जीत डिज़र्व करती है और इतना खराब खेलने पर भारत किसी से भी हार सकता है. और बल्लेबाज़ी और फ़ील्डिंग इस हार के लिए सबसे ज्यादा ज़िम्मेदार हैं.
बदलाव नंबर 4
कदमों का करें इस्तेमाल
भारतीय टीम पर आज कल नए-नए स्पिन गेंदबाज़ इन पिचों पर हावी हो रहे हैं. ऐसा नहीं है कि पहले इनसे बेहतर गेंदबाज़ी नहीं हुई या फिर पहले इन बल्लेबाज़ों से बहुत बेहतरीन बल्लेबाज़ टीम में थे. फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि इन पिचों पर खेलने का तरीका पिछले दौर के बल्लेबाज़ों का ज्यादा अच्छा था. शेन वॉर्न पर हावी होने के लिए सबसे बड़ा फ़ैक्टर नवजोत सिंह सिद्धू रहे थे. उन्होंने शुरुआत में ही कदमों का इस्तेमाल कर वॉर्न पर लंबे छक्के लगाए. मुरलीधरन जैसे गेंदबाज़ पर हावी होने के पीछे भी वीरेंद्र सहवाग का फ़ुटवर्क और आक्रामक रवैया काम आया. सचिन हर सीज़न के बल्लेबाज़ रहे और पैडल स्वीप, फ़ुटवर्क और स्वीप जैसे शॉट्स में परफ़ेक्शन दिखाई. अब भी उससे कुछ सीखने की ज़रूरत है.
ये बदलाव जीत की गारंटी भले ही साबित न हों लेकिन ये वह विकल्प ज़रूर हैं जिन पर भारतीय टीम के कप्तान और मैनेजमेंट को विचार करना होगा, क्योंकि हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से और अगले मैच में बल्लेबाज़ों के एक अलग पिच पर चलने की उम्मीद पर टिकने से सीरीज़ भारतीय टीम के हाथों से फिसल सकती है..
बदलाव नंबर 1
पिच रैंक टर्नर नहीं स्पिन फ़्रेंड्ली हो
पुणे में पहले दिन दूसरे ओवर में ही स्पिनर को लगा दिया गया और गेंद ने स्क्वेयर टर्न लेना शुरू कर दिया था. ऐसी रैंक टर्नर पर सही जगह पर गेंदबाज़ी कर विपक्षी टीम हावी हो सकती है. साल 2004 में कंगारू टीम के खिलाफ़ मुंबई टेस्ट, फिर साल 2012 में इंग्लैंड सीरीज़ इसी बात के कुछ उदाहरण हैं. जबकि स्पिन फ़्रेंड्ली पिचों पर जहां बेहतर स्किल्स से विकेट मिलेगा, वहां टीम इंडिया के स्पिनर हावी होंगे, क्योंकि वह ऐसी ही पिचों पर खेलकर बड़े हुए हैं वहां उनसे बेहतर कोई नहीं..
बदलाव नंबर 2
जयंत की जगह कुलदीप
अभ्यास मैच में भारत ए के लिए कुलदीप यादव को नहीं खिलाया गया. बाएं हाथ का यह चाइनामैन गेंदबाज़ न केवल कंगारुओं के लिए बल्कि विश्व क्रिकेट में भी एक अन-नोन एंटिटी (जिसके बारे में कोई अधिक नहीं जानता) है. विश्व में ढूंढने पर भी चाइनामैन गेंदबाज नहीं मिलते हैं. ऐसे में कुलदीप यादव को इस कंगारू टीम के खिलाफ़ टेस्ट किया जा सकता है. जहां हर गेंदबाज़ के खिलाफ़ उनकी तैयारी पूरी हो सकती है. कुलदीप के खिलाफ़ वो फंस सकते हैं.
बदलाव नंबर 3
प्लेइंग XI में हों करुण नायर
तिहरा शतक लगाने के बाद टीम से बाहर होने के उदाहरण ज्यादा नहीं, लेकिन करुण नायर उसमें शुमार हो चुके हैं. नायर नए हैं, टीम में रहने और जगह बनाने का जज्बा है, तिहरे शतक का कॉन्फिडेंस है, ऐसे में उन्हें अंतिम ग्यारह में शामिल करना होगा. कर्नाटक के लिए खेलने वाले करुण से बेहतर बेंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच को कोई और बल्लेबाज़ नहीं जानता.
NDTV से बात करते हुए पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा कि करुण नायर को टीम में शामिल करना ही होगा. यह एक बदलाव ज़रूरी है. फिर चाहे वह जयंत यादव की जगह हो या फिर किसी पेसर को हटाकर उन्हें टीम में लाया जाए. इसका फ़ैसला बेंगलुरू की पिच को देखने के बाद लिया जाना चाहिए लेकिन बदलाव ज़रूरी है
कप्तान विराट ने कहा कि कंगारू टीम तीनों दिन भारत से बेहतर खेली और ऐसा खेलने पर वो जीत डिज़र्व करती है और इतना खराब खेलने पर भारत किसी से भी हार सकता है. और बल्लेबाज़ी और फ़ील्डिंग इस हार के लिए सबसे ज्यादा ज़िम्मेदार हैं.
बदलाव नंबर 4
कदमों का करें इस्तेमाल
भारतीय टीम पर आज कल नए-नए स्पिन गेंदबाज़ इन पिचों पर हावी हो रहे हैं. ऐसा नहीं है कि पहले इनसे बेहतर गेंदबाज़ी नहीं हुई या फिर पहले इन बल्लेबाज़ों से बहुत बेहतरीन बल्लेबाज़ टीम में थे. फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि इन पिचों पर खेलने का तरीका पिछले दौर के बल्लेबाज़ों का ज्यादा अच्छा था. शेन वॉर्न पर हावी होने के लिए सबसे बड़ा फ़ैक्टर नवजोत सिंह सिद्धू रहे थे. उन्होंने शुरुआत में ही कदमों का इस्तेमाल कर वॉर्न पर लंबे छक्के लगाए. मुरलीधरन जैसे गेंदबाज़ पर हावी होने के पीछे भी वीरेंद्र सहवाग का फ़ुटवर्क और आक्रामक रवैया काम आया. सचिन हर सीज़न के बल्लेबाज़ रहे और पैडल स्वीप, फ़ुटवर्क और स्वीप जैसे शॉट्स में परफ़ेक्शन दिखाई. अब भी उससे कुछ सीखने की ज़रूरत है.
ये बदलाव जीत की गारंटी भले ही साबित न हों लेकिन ये वह विकल्प ज़रूर हैं जिन पर भारतीय टीम के कप्तान और मैनेजमेंट को विचार करना होगा, क्योंकि हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से और अगले मैच में बल्लेबाज़ों के एक अलग पिच पर चलने की उम्मीद पर टिकने से सीरीज़ भारतीय टीम के हाथों से फिसल सकती है..
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, India Vs Australia, विराट कोहली, Virat Kohli, पुणे टेस्ट, Pune Test, करुण नायर, Karun Nair, Cricket News In Hindi