जिरोधा के फाउंडर ने शेयर की ससुर की कहानी, बताया सच्ची खुशी का राज क्या है...

यह बात अब जानी मानी ब्रोकिंग फर्म जिरोधा के को-फाउंडर नितिन कामत ने कही है. नितिन ने यह बात अपने ससुर से सीखी और उनसे ही यह प्रेरणा ली है. नितिन अपने ससुर से इतने प्रभावित हैं कि अपने ससुर की कहानी तक उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर की है. 

जिरोधा के फाउंडर ने शेयर की ससुर की कहानी, बताया सच्ची खुशी का राज क्या है...

जिरोधा के को-फाउंडर नितिन कामत अपने ससुर के साथ...

नई दिल्ली:

जिंदगी में क्या पैसा आपका सच्ची खुशी दे सकता है. जवाब है नहीं, पैसा से ज्यादा जरूरी है संतोष करना और यह कि आपका स्वास्थ्य सही रहे और आपका मस्तिष्क और शरीर आपके अंतिम क्षणों तक एक्टिव रहे. यह हम सब जानते हैं, लेकिन कम ही लोग है जो इस हकीकत को जीवन में उतार पाते हैं और सच्ची खुशी का आनंद ले पाते हैं. 

यह बात अब जानी-मानी ब्रोकिंग फर्म जिरोधा के को-फाउंडर नितिन कामत ने कही है. नितिन ने यह बात अपने ससुर से सीखी और उनसे ही यह प्रेरणा ली है. नितिन अपने ससुर से इतने प्रभावित हैं कि अपने ससुर की कहानी तक उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर की है. 

नितिन ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि संतोष ही सच्ची आजादी का मार्ग है. जिसके पास यह है वह मेरे ससुर शिवाजी पाटिल हैं. नितिन अपने ससुर के बारे में आगे बताते हैं कि उनके ससुर भारतीय सेना में थे और कारगिल युद्ध के दौरान  ठंड के चलते अपनी अंगुली गंवाने के बाद सेना से वीआरएस ले लिया. इसके बाद वे बेलगाम में अपनी एक किराने की दुकान चलाने लगे. 

ट्वीट की सीरीज में नितिन अपने ससुर की बात करते हुए लिखते हैं कि वे अब 70 साल के हो चुके हैं लेकिन आज वे दुकान के लिए सामान खरीदने के लिए अपने एक दशक से भी ज्यादा पुराने स्कूटर पर जाते हैं.उनकी मदद के लिए केवल एक ही हाथ है जो मेरी सास है. दुकान पर अपने पति का हाथ बंटाना और घर की देखभाल करना उनका काम है. 

नितिन अपने ससुर के बारे में लिखते हैं कि सीमा (नितिन की वाइफ) के कामयाबी के बाद भी ससुर जी ने काम न करने से मना कर दिया. दुकान पर काम उनको कितना पसंद है उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मार्जिन के बारे में बात करते हुए उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. नितिन बताते हैं कि वे एक पैकेट चिक्की बेचने में 25 प्रतिशत का मार्जिन मिलता है. 

नितिन बताते हैं कि उन्होंने अपने ससुर से कभी भी किसी भी तरह की इच्छा होने की बात नहीं सुनी और न ही कभी किसी प्रकार की शिकायत ही सुनी. यहां तक की कारगिर में अपनी अंगुली गंवाने के बारे में भी वे कभी शिकायत नहीं करते हैं. हां, यह अलग बात है कि 2007 में जब उन्होंने उनकी बेटी का हाथ मांगा था तब उन्होंने नितिन को सरकारी नौकरी पकड़ने की बात कही थी. 

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पीएम नरेंद्र मोदी के साथ जिरोधा के को-फाउंडर नितिन कामत

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नितिन बताते हैं कि जब भी ज्यादा जीवन के बारे में सोचता हूं या फिर ये सोचता है कि अंतिम पलों तक कैसे एक अच्छी जिंदगी जी जाए. तब मेरे पास बिना शक के एक ही उत्तर होता है, संतोष. साथ ही कभी भी दिमागी तौर पर शारीरिक तौर पर एक्टिव रहना नहीं छोड़ना है. पैसा यह सब नहीं खरीद सकता और वे सबसे बड़ा उदाहरण हैं.