यह ख़बर 24 मार्च, 2013 को प्रकाशित हुई थी

शेयर बाजार : उतार-चढ़ाव भरा रहेगा संक्षिप्त कारोबारी सप्ताह

खास बातें

  • देश के शेयर बाजारों में अगले सप्ताह वायदा और विकल्प (एफएंडओ) सौदों की परिपक्व ता अवधि पूरी होने के कारण उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
मुंबई:

देश के शेयर बाजारों में अगले सप्ताह वायदा और विकल्प (एफएंडओ) सौदों की परिपक्व ता अवधि पूरी होने के कारण उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगले सप्ताह बुधवार 27 मार्च को होली के मौके पर और शुक्रवार 29 मार्च को गुडफ्राइडे के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहेंगे।

निवेशक एफएंडओ की परिपक्व ता अवधि पूरी होने के कारण निवेश के पैंतरे बदलेंगे और अप्रैल 2013 के लिए निवेश के फैसले लेंगे। इस माह के आखिरी कारोबारी दिन गुरुवार 28 मार्च को एफएंडओ सौदे का निपटारा करना होगा।

आगामी गर्मी के महीनों को देखते हुए निवेशक उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, पर्यटन और यात्रा से संबंधित कंपनियों को निवेश के लिए खंगाल सकते हैं। गर्मियों में उत्तर भारत में स्कूलों में छुट्टी होती है और लोग परिवार सहित पर्यटन की योजना बनाते हैं, जिसके कारण इन कारोबारों में लगी कंपनियों की आय इस अवधि में बढ़ जाती है। यही नहीं इस अवधि में एयर कंडीशनर, कूलर, पंखे जैसे उत्पाद बनाने वाली कम्पनियों को भी अधिक आय होती है। इसलिए जून से अक्टूबर तक मुनाफा काटने के लिहाज से निवेश इन कारोबारों से सम्बंधित कम्पनियों में निवेश कर सकते हैं।

बाजार में बड़े पैमाने पर शेयरों की आपूर्ति के कारण शेयरों की कीमतों में आम तौर पर उछाल आने की उम्मीद नहीं लगाई जा सकती है, क्योंकि बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के दिशा-निर्देशों और समय सीमा के तहत निजी और सरकारी क्षेत्र की सूचीबद्ध कम्पनियों के जून से अगस्त तक कम्पनियों की 10 से 25 फीसदी हिस्सेदारी आम निवेशकों को देनी है। इस प्रक्रिया में बाजार में शेयरों की बाढ़ आ जाएगी और कीमतें ऊपर की ओर चढ़ने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

इस माह शुक्रवार 22 मार्च से संसद में चालू बजट सत्र का मध्यावकाश हो गया। सत्र फिर 22 अप्रैल 2013 से चालू होगा, जो 10 मई तक चलेगा।

सरकार चालू बजट सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार करने वाली है। इनमें प्रमुख हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक-2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008।

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इन विधेयकों के पारित होने या न होने या सरकार और विपक्ष के झुकाव से भी निवेश कई शेयरों के लिए दूरगामी फैसला कर सकते हैं।