खास बातें
- कारोबारियों को अब इस सप्ताह जारी होने वाले इंफोसिस टेक्नोलॉजीज के परिणामों का आसरा है। इससे बाजार के आगे की दिशा तय होगी।
New Delhi: एक साल की ऊंचाई पर पहुंची खाद्य मुद्रास्फीति से ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका के चलते गत सप्ताह शेयर बाजार बुरी तरह टूट गया। कारोबारियों को अब इस सप्ताह जारी होने वाले इंफोसिस टेक्नोलॉजीज के परिणामों का आसरा है। इससे बाजार के आगे की दिशा तय होगी। बाजार विशेषज्ञों ने यह राय व्यक्त की है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि शेयर बाजार में प्रोत्साहन की कमी दिखाई देती है और अब उसकी निगाह प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस टेक्नोलॉजीज के अक्टूबर-दिसंबर के तिमाही कार्यपरिणामों पर है, जिससे 13 जनवरी को कंपनियों के कार्यपरिणामों की शुरुआत होगी। एसएमसी कैपिटल के रणनीतिकार और शोध प्रमुख जगन्नाथन थुनुगुंटला ने कहा, खाद्य वस्तुओं की बढ़ती मुद्रास्फीति और बढ़ते चालू खाते के घाटे के मद्देनजर ब्याज दरों में वृद्धि किए जाने सहित कई सारे नकारात्मक संकेत मौजूद हैं और शेयर बाजारों में कुल मिलाकर हताशा का रुख है। लेकिन इंफोसिस के कार्यपरिणाम लड़खड़ाते शेयर बाजार को गति प्रदान करने वाले साबित हो सकते हैं। शेयर बाजार के लिए साल का पहला सप्ताह निराशाजनक रहा, क्योंकि इस दौरान प्रमुख इंडेक्स में 817 अंक अथवा 3.98 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति जो पिछले सप्ताह 14.44 प्रतिशत पर थी, वह 25 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 3.88 प्रतिशत बढ़कर 18.32 प्रतिशत हो गई, जिसकी मुख्य वजह थोक बाजार में सब्जियों की आसमान छूती कीमतें रही हैं। यह शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण बनी। इसके अलावा देश का चालू खाते के घाटे में जुलाई-सितंबर अवधि में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 72 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज हुई। बाजार पर्यवेक्षकों का मानना है कि शेयर बाजार में आने वाले सप्ताह में गिरावट जारी रहेगी, जहां विदेशी संस्थागत निवेशक बाजार से धन निकाल रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंसल सर्विसेज के सह-संस्थापक एवं संयुक्त प्रबंध निदेशक रामदेव अग्रवाल ने कहा, मुद्रास्फीति और घोटालों ने अल्पावधि परिदृश्य को काफी अनिश्चित बना दिया है। विदेशी हर दिन बिकवाली कर रहे हैं। बाजार सरकार से गैर-मुद्रास्फीतिकारी कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है। अग्रवाल के इस दृष्टिकोण से समर्थन जताते हुए अशिका स्टाक ब्रोकर्स के शोध प्रमुख पारस बोथरा ने कहा कि अनिश्चित बाजार को इंफोसिस के तिमाही कार्यपरिणाम से कोई दिशा मिलने की उम्मीद है। हालांकि बाजार पर्यवेक्षकों का मानना है कि इंफोसिस के तिमाही कार्यपरिणाम बाजार को हैरत में डालने वाले नहीं हो सकते, क्योंकि आईटी क्षेत्र डॉलर और पौंड के मुकाबले रुपये के मजबूत होने के कारण पहले ही दबाव में है। बंबई शेयर बाजार का सूचकांक 8 जनवरी को समाप्त सप्ताह में 817.28 अंक अथवा 3.98 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,691.81 अंक पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताहांत 20,509.09 अंक पर बंद हुआ था। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 229.90 अंक अथवा 3.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,904.60 अंक पर बंद हुआ।