इंदौर: गर्मियों के दौरान यात्रियों की बाढ़ से रेलगाड़ियों में टिकटों के लिए मचने वाली मारामारी और इनकी कालाबाजारी के किस्से किसी से छिपे नहीं हैं, लेकिन पश्चिम रेलवे ने गर्मियों में चलाई जाने वाली सामान्य किराये वाली विशेष ट्रेनों की तादाद में इस साल बड़ी कटौती कर दी। पश्चिम रेलवे ने इस वर्ष गर्मियों के दौरान ऐसी केवल दो विशेष ट्रेनें चलाईं।
यह खुलासा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी में हुआ है। पश्चिम रेलवे से यह ब्यौरा हासिल करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौर ने बताया, इस वर्ष गर्मियों की छुट्टियों में पश्चिम रेलवे ने सामान्य किराये वाली मात्र दो विशेष रेलगाड़ियां चलाईं, जिनसे कुल 48 फेरे लगवाये गए, जबकि गुजरे बरसों में गर्मियों के दौरान चली विशेष यात्री ट्रेनों की संख्या इससे बहुत ज्यादा रही है।
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2014 में पश्चिम रेलवे ने 26 समर स्पेशल ट्रेनें चलाकर इनसे 1,011 फेरे लगवाए। वर्ष 2013 में पश्चिम रेलवे ने 31 समर स्पेशल ट्रेनें चलायीं और इनसे 1,727 फेरे लगवाये गये। वर्ष 2012 में पश्चिम रेलवे की 24 समर स्पेशल ट्रेनों ने 630 फेरे लगाए। वर्ष 2011 में पश्चिम रेलवे की 33 समर स्पेशल ट्रेनों से 1,420 फेरे लगवाये गए।
मध्य प्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा, ‘यात्रियों की भारी भीड़ वाले अवसरों पर पश्चिम रेलवे अब सामान्य किराये वाली विशेष ट्रेनें चलाने के बजाय अपेक्षाकृत महंगा किराया वसूलने वाली प्रीमियम रेलगाड़ियों पर जोर दे रहा है। इससे रेलवे की जेब तो भर रही है। लेकिन कमजोर आय वर्ग वाले यात्रियों को खासी मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है।
गौर ने बताया कि उन्होंने जब आरटीआई के जरिये पश्चिम रेलवे से पूछा कि अपेक्षाकृत महंगे किराये वाली प्रीमियम रेलगाड़ियां चलाने का फैसला किस आधार पर किया जाता है, तो जवाब मिला कि ये ट्रेनें रेलवे बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक, एवं वाणिज्य विभाग से प्राप्त मांग व परिचालन की व्यवहार्यता के आधार पर चलायी जाती हैं।