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पिता करते थे कैरी बैग सप्लाई और बेटी बन गई IAS, गरीबी में पली रितिका ने छू लिया आसमान

रितिका ने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है. पहले प्रयास में वे प्रारंभिक परीक्षा तक पहुंची थीं, जबकि दूसरे प्रयास में उन्होंने साक्षात्कार तक का सफर तय किया था, लेकिन अंतिम परिणाम में उनका चयन नहीं हो सका था. तीसरे प्रयास में उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः सफलता हासिल कर ली.

पिता करते थे कैरी बैग सप्लाई और बेटी बन गई IAS, गरीबी में पली रितिका ने छू लिया आसमान
परिवार की आर्थिक तंगी को चुनौती मानकर रितिका ने खुद के बल पर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की.

बिहार के नवादा जिले के हिसुआ नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत पांचू निवासी रितिका पांडेय ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 185वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. सीमित संसाधनों के बीच कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है. उनकी सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है. रितिका पांडेय के पिता संजय पांडेय मूल रूप से हिसुआ पांचू के निवासी हैं और साधारण व्यवसाय करते हैं. वे दुकानों में कैरी बैग की आपूर्ति करने का काम करते हैं, लेकिन बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना उनका सपना और जुनून रहा है. पिता के इसी संघर्ष और लगन को रितिका ने अपने जीवन की प्रेरणा बनाया.

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

रितिका ने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है. पहले प्रयास में वे प्रारंभिक परीक्षा तक पहुंची थीं, जबकि दूसरे प्रयास में उन्होंने साक्षात्कार तक का सफर तय किया था, लेकिन अंतिम परिणाम में उनका चयन नहीं हो सका था. तीसरे प्रयास में उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः सफलता हासिल कर ली.

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उनकी प्रारंभिक शिक्षा झारखंड और दिल्ली में हुई है. रांची के मनन विद्या स्कूल से उन्होंने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. बारहवीं की परीक्षा में वे पूरे राज्य में दूसरे स्थान पर रही थीं. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज से भौतिकी (प्रतिष्ठा) में स्नातक की पढ़ाई पूरी की, जिसमें उन्होंने 9.7 सीजीपीए के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया.

आर्थिक चुनौती को दी मात

परिवार की आर्थिक तंगी को चुनौती मानकर रितिका ने खुद के बल पर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और अपने सपने को साकार किया. उनकी माता बबीता पांडेय एक साधारण गृहिणी हैं. परिवार में दो बहनें कृति और पूजा तथा छोटा भाई हर्ष पांडेय हैं, जो उनकी सफलता से बेहद खुश और गौरवान्वित हैं. रितिका की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के लोगों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें बधाई दी है.

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