अगस्त में घट सकती हैं ब्याज दरें, विश्लेषकों को इन कारणों से रिजर्व बैंक से हैं उम्मीदें- फाइल फोटो
खास बातें
- आर्थिक विश्लेषकों को अगस्त में होने वाली मौद्रिक समीक्षा से उम्मीदें
- मुद्रास्फीति लंबे समय तक अनुकूल बनी रहती है तो इसके आस बढ़ेगी
- जून में आरबीआई ने समीक्षा बैठक में कटौती नहीं की थी
मुंबई: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जून में मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में भले ही रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में सीधे कटौती करके ब्याज दरों में कटौती की सीधी राह बुलंद न की गई हो लेकिन जानकार मानते हैं कि अगस्त में आरबीआई इस बाबत फैसला ले सकता है.
आर्थिक विश्लेषकों को अगस्त में होने वाली मौद्रिक समीक्षा में मुख्य नीतिगत दर में कटौती की मजबूत उम्मीद बंधी है. यह उम्मीद मई माह में खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े पिछले एक दशक में 2.18 प्रतिशत तक गिर जाने के बाद बंधी है.
भारतीय स्टेट बैंक की आर्थिक शोध शाखा ने कहा है कि रिजर्व बैंक अगस्त में होने वाली नीतिगत समीक्षा में दर में कटौती को नजरअंदाज नहीं कर सकता है. शोध विभाग ने एक नोट में कहा है, यदि मुद्रास्फीति लंबे समय तक अनुकूल बनी रहती है तो दर में कटौती की उम्मीद और मजबूत होगी.
घरेलू ब्रोकरेज फर्म कोटक सिक्युरिटीज ने कहा है कि जून माह में खुदरा मुद्रास्फीति का आंकड़ा दो प्रतिशत से नीचे आ जायेगा. यह आंकड़ा मार्च 2018 तक 4 प्रतिशत पर रहेगा जो कि रिजर्व बैंक का मध्यम अवधि का लक्ष्य है. इसमें कहा गया है कि इस लिहाज से अगस्त में दर कटौती के लिये मंच तैयार है.
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ब्रोकरेज फर्म के अर्थशास्त्री ने भी कहा है कि वह दो अगस्त को होने वाली तीसरी द्वैमासिक मौद्रिक नीति में 0.25 प्रतिशत कटौती को लेकर पहले से ज्यादा आश्वस्त हैं. निजी क्षेत्र के बैंक आईडीएफसी बैंक ने हालांकि कहा है कि मौद्रिक नीति समिति पर दबाव बढ़ रहा है फिर भी अगस्त माह की कटौती को शतप्रतिशत नहीं कहा जा सकता है. इसमें तुलनात्मक आधार प्रभाव की वापसी और 7वें वेतन आयोग के भत्तों के लागू होने का प्रभाव हो सकता है. इससे मुद्रास्फीति का आंकड़ा मार्च2018 तक चार प्रतिशत से उपर जा सकता है.