यह ख़बर 22 नवंबर, 2013 को प्रकाशित हुई थी

रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पूंजी आधार पर चिंता जताई

मुंबई:

रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बिगड़ती पूंजी स्थिति को लेकर गुरुवार को चिंता जताई हालांकि कहा कि इनका पूंजी पर्याप्तता अनुपात सांविधिक जरूरत से ऊपर है।

रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में यह भी कहा है कि संवेदनशील क्षेत्रों को बैंक कर्ज बढ़ा है ‘वर्ष 2012-13 में बैंकिंग क्षेत्र की प्रवृत्ति और प्रगति’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा है, ‘पिछली प्रवृत्तियों की तरह पूंजी जोखिम परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) निर्धारित नौ प्रतिशत से अधिक रहा, लेकिन इसके घटने की प्रवृत्ति है।’

मार्च 2013 के अंत में बासेल-1 के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सीआरएआर 11.31 प्रतिशत रहा जो एक वर्ष पूर्व 11.88 प्रतिशत था। बासेल-दो के तहत यह 12.38 प्रतिशत रहा जो इससे पूर्व वर्ष में 13.23 प्रतिशत था।

निजी क्षेत्र के बैंकों का सीआरएआर बासेल-1 के तहत 15.10 प्रतिशत रहा जो बासेल-दो के तहत 16.84 प्रतिशत था।

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रिजर्व बैंक ने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की घटती पूंजी स्थिति चिंता का विषय है..।’ केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि संवेदनशील क्षेत्रों को बैंक कर्ज बढ़ा है और 2012-13 में यह दोगुना होकर 10,20,600 करोड़ रुपये रहा। इसका मुख्य कारण रीयल एस्टेट क्षेत्र को दिया गया कर्ज है। संवेदनशील क्षेत्रों में रीयल एस्टेट, पूंजी बाजार आदि शामिल हैं।