यह ख़बर 14 अगस्त, 2013 को प्रकाशित हुई थी

मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 5.79 प्रतिशत पर पहुंची

खास बातें

  • खाद्य उत्पादों, विशेषतौर पर प्याज समेत सब्जियों की कीमतों में दहाई अंक में बढ़ोतरी के मद्देनजर थोक मुद्रास्फीति लगातार दूसरे महीने बढ़कर जुलाई में 5.79 प्रतिशत हो गई।
नई दिल्ली:

खाद्य उत्पादों, विशेषतौर पर प्याज समेत सब्जियों की कीमतों में दहाई अंक में बढ़ोतरी के मद्देनजर थोक मुद्रास्फीति लगातार दूसरे महीने बढ़कर जुलाई में 5.79 प्रतिशत हो गई।

थोकमूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति जून 2013 में 4.86 प्रतिशत और पिछले साल जुलाई में मंहगाई दर 7.52 प्रतिशत थी।

आज जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य उत्पाद वर्ग में थोकमूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इस बार जुलाई में बढ़कर 11.91 प्रतिशत पर पहुंच गई। ऐसा मुख्य तौर पर प्याज, अनाज और चावल की कीमत में बढ़ोतरी के कारण हुआ।

थोकमूल्य सूचकांक में 14.43 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले खाद्य उत्पादों संबंधी मुद्रास्फीति इस वर्ष जून में 9.74 प्रतिशत थी। खाद्य उत्पाद खंड की मुद्रास्फीति में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी हुई है।

प्याज की कीमत जुलाई में पिछले साल की तुलना में 145 प्रतिशत ऊंची रही। जून में प्याज का भाव सालाना आधार पर 114 प्रतिशत ऊंचा था।

जुलाई में सब्जियों के वर्ग में मुद्रास्फीति बढ़कर 46.59 प्रतिशत हो गई जबकि जून में यह 16.47 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पाद खंड की मुद्रास्फीति जुलाई में आंशिक रूप से बढ़कर 2.81 प्रतिशत हो गई, जो जून में 2.75 प्रतिशत थी।

गैर-खाद्य उत्पाद खंड जिसमें फाइबर, तिलहन और खनिज शामिल हैं, की महंगाई दर घटकर 5.51 प्रतिशत हो गई, जो जून में 7.57 प्रतिशत थी।

चावल के दाम जुलाई में सालाना आधार पर 21.15 प्रतिशत ऊंचे रहे जबकि जून में चावल की मुद्रास्फीति 19.11 प्रतिशत थी। अनाजों में जुलाई की मुद्रास्फीति 17.66 प्रतिशत रही, जो इसी वर्ष जून में 17.18 प्रतिशत थी।

इस बीच मई 13 के थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों में मुद्रास्फीति 4.58 प्रतिशत रही। प्रारंभिक आंकड़ों में इसे 4.70 प्रतिशत बताया गया था।

यह पिछले चार महीने में पहला मौका है जबकि थोकमूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर पांच प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। मार्च में यह 5.65 प्रतिशत थी और इसके बाद से यह पांच प्रतिशत से नीचे चल रही थी।

रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि मार्च,14 के अंत तक मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत के स्तर पर ही रहेगी।

रिजर्व बैंक ने पिछले माह पेश मौद्रिक नीति की पहली समीक्षा में कहा था कि उम्मीद से बेहतर मानसून के कारण खाद्य मुद्रास्फीति उतनी कम नहीं हुई है, जितनी होनी चाहिए थी। विशेषतौर पर मौसम की मार के कारण आपूर्ति बाधा के कारण सब्जियों की कीमत प्रभावित हुई है।

वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने इससे पहले कहा था कि खुदरा मुद्रास्फीति को कम करने के लिए आपूर्ति की दिक्कतें दूर करने की जरूरत है।

आंकड़ों के मुताबिक, अंडा, मांस और मछली की मंहगाई दर जुलाई में 10.94 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले महीने 12.23 प्रतिशत थी।

हालांकि जुलाई में आलू की कीमत सालाना आधार पर 6.45 प्रतिशत घटी। दाल की कीमत 7.39 प्रतिशत घटी। जून में दाल की महंगाई दर 1.59 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली खंड में मुद्रास्फीति जुलाई में 11.31 प्रतिशत थी जो पिछले महीने 7.12 प्रतिशत थी।

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इस सप्ताह जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 9.64 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने 9.87 प्रतिशत थी।