मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार से राहत के बावजूद कई चुनौतियां बरकरार

डिमांड अब भी कोरोना संकट की वजह से कमज़ोर, नकदी की समस्या, बाजार से फंड एक्सेस करना अब भी आसान नहीं

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार से राहत के बावजूद कई चुनौतियां बरकरार

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया की तोशी आटोमेटिक सिस्टम्स कंपनी में काम तेजी से चल रहा है. कंपनी अपने क्लाइंट्स के लिए हाईटेक आटोमेटिक सिस्टम्स (high-tech automatic systems) और आटोमेशन प्रोडक्ट (automation products) बनाती है. कंपनी की आटोमेटिक असेंबली लाइन पर वर्कर अत्याधुनिक मशीनों पर काम कर रहे हैं. बाजार में डिमांड सुधरी है, काम बढ़ रहा है.  

कम्पनी के मालिक संजीव सचदेव खुश हैं कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कोरोना काल की पहली तिमाही में ऐतिहासिक गिरावट के बाद 0.6% का सुधार आया है, माहौल में सुधार हो रहा है. संजीव सचदेव ने NDTV से कहा, "39.6% की गिरावट के बाद 0.6% की ग्रोथ मैन्युफैक्चरिंग में दिखाता है कि बुरा वक्त ख़त्म हो गया है.''


कंपनी के सेल्स हेड सिद्धांत ने  NDTV से कहा, "सबसे बड़ा चेंज सेल्स में आया है. बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू हो रहे हैं, रिटेल इतना पिचकूप नहीं लेकिन सरकार और प्राइवेट सेक्टर के बड़े प्रोजेक्ट्स अब रिवाइवल स्टेज में जा रहे हैं.''
 
लेकिन चुनौतियां भी बरकरार हैं. विशेषकर डिमांड अब भी कोरोना संकट की वजह से कमज़ोर है. नकदी की समस्या बनी हुई है. बाजार से फंड एक्सेस करना अब भी आसान नहीं है. वेंडर्स को सरकारी संस्थाओं से बकाया पेमेंट मिलने मैं अब भी काफी देरी हो रही है. संजीव सचदेव ने कहा, " अब हमें सेकंड बूस्टर की जरूरत है. अब बाजार में डिमांड बढ़ाना सबसे जरूरी होगा."

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साफ़ है, पहली तिमाही की बड़ी गिरावट के बाद मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार एक राहत की खबर जरूर है लेकिन आगे अभी चुनौतियां और भी हैं जिनसे सरकार को निपटना होगा. सरकार को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आए सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ने के लिए अभी कई स्तर  पर पहल करना होगी.