नई दिल्ली: उद्योग मंडल फिक्की (FICCI) ने सरकार से आगामी आम बजट (Budget 2023) में घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर (Windfall Profit Tax) को समाप्त करने की मांग की है. उद्योग मंडल ने कहा है कि इस तरह का कर निवेश आधारित तेल एंड गैस सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. उद्योग मंडल ने आम बजट के लिए सरकार को दी सिफारिशों में यह मांग की है. देश ने पहली बार पिछले साल एक जुलाई को अप्रत्याशित लाभ कर लगाया था. इसके साथ भारत उन देशों में शामिल हो गया था जो ऊर्जा कंपनियों के सामान्य से अधिक मुनाफे पर टैक्स लगाते हैं. उस समय घरेलू कच्चे तेल पर 23,250 रुपये प्रति टन (40 डॉलर प्रति बैरल) का विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाया गया था. पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन एटीएफ के निर्यात पर भी नया टैक्स लगाया गया है. प्रत्येक पखवाड़े में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर इसकी समीक्षा की जाती है.
उद्योग मंडल फिक्की ने बजट के लिए अपनी सिफारिशों में कहा है कि इस तरह का टैक्स अन्य सभी मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त है. फिक्की ने कहा, ‘‘पेट्रोलियम कच्चे तेल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) को हटा दिया जाना चाहिए या यदि असाधारण उपाय के रूप में कुछ समय के लिए इसे जारी रखने की आवश्यकता है, तो इसकी दर को सीमित किया जाना चाहिए.'' फिक्की ने कहा कि यह विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स अन्य शुल्कों के अतिरिक्त है.
फिक्की ने कहा कि इसके अलावा विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स की गणना प्रति टन उत्पादन के आधार पर की जाती है. इसकी गणना प्राप्त मूल्य के प्रतिशत के हिसाब से नहीं होती. ऐसे में दाम घटने पर तेल उत्पादकों के लिए दिक्कतें आती हैं.
फिक्की ने कहा, ‘‘यह टैक्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट के निवेश प्रस्तावों को प्रभावित कर रहा है.''
वेदांता लिमिटेड के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुनील दुग्गल ने कहा कि वर्तमान में, घरेलू कच्चे तेल उत्पादकों पर लगभग 70 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है. वैश्विक मानकों का पालन करते हुए 35-40 प्रतिशत का टैक्स स्ट्रक्चर इस सेक्टर में महत्वपूर्ण निवेश को बढ़ावा देगी.
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