खास बातें
- रेलमंत्री पवन कुमार बंसल 26 फरवरी को पेश किए जाने वाले अपने पहले रेल बजट में ट्रेनों में साफ-सफाई, अग्निशमन व्यवस्था को दुरूस्त करने तथा सभी यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं जैसी चीजों पर जोर दे सकते हैं।
नई दिल्ली: रेलवे 2013-14 के बजट में विभिन्न राज्यों की मांग को पूरा करने के लिए एसी डबल डेकर समेत करीब 100 ट्रेनें शुरू कर सकता है। इसके अलावा कुछ ट्रेनों की सेवाओं का विस्तार भी किया जा सकता है।
जहां तक इंजन, रेल डिब्बे तथा वैगन विनिर्माण कार्यक्रम का सवाल है, बजट में 600 एलएचबी डिब्बों समेत 4200 नए डिब्बों के र्माण की घोषणा की जा सकती है। साथ ही 20 एलएनजी इंजन समेत 670 नए इंजन बनाए जाने की घोषणा के साथ करीब 16,000 नए वैगन के निर्माण का ऐलान किया जा सकता है।
रेल मंत्रालय के सूत्रों ने बताया, इस साल रेल बजट में यात्रियों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा सकता है। ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे पूर्वोत्तर समेत सभी क्षेत्रों की मांग को पूरा किया जाए, क्योंकि विभिन्न राज्यों से नए ट्रेनों के लिए अनुरोध किए गए हैं।
सूत्रों ने कहा कि बजट में करीब 100 नई ट्रेनों की घोषणा की जाएगी। लोगों की मांग को देखते हुए कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों का विस्तार तथा कुछ लोकप्रिय ट्रेनों के फेरे भी बढ़ाए जा सकते हैं। पिछले साल रेलवे ने 175 ट्रेनों को शुरू किए जाने की घोषणा की थी।
रेलमंत्री पवन कुमार बंसल 26 फरवरी को पेश किए जाने वाले अपने पहले रेल बजट में ट्रेनों में साफ-सफाई, अग्निशमन व्यवस्था को दुरूस्त करने तथा सभी यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं जैसी चीजों पर जोर दे सकते हैं। बंसल नेत्रहीन यात्रियों के लिए डिब्बों के अंदर ब्रेल स्टीकर उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को भी बजट में हरी झंडी दे सकते हैं।
कुल 543 ट्रेनों में शौचालय तथा डिब्बों के साफ-सफाई के लिए 'ऑन बोर्ड हाउस कीपिंग' योजना शुरू की जा सकती है। इसके तहत चलती ट्रेन में साफ-सफाई की व्यवस्था होगी। रेलवे ने 10 मशीनयुक्त लांड्री स्थापित करने का प्रस्ताव किया है, ताकि साफ-सुथरा चादर, कंबल और अन्य सामानों की आपूर्ति की जा सके।
एसी डिब्बों तथा पैंट्री कारों में अग्निशमन के लिए विशेष उपाय किए जा सकते हैं, क्योंकि आग लगने की आशंका सबसे ज्यादा इन्हीं जगहों पर होती है। नकदी संकट से जूझ रहे रेलवे को सामान्य बजटीय समर्थन के रूप में अगले वित्तवर्ष के लिए 28,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं, जबकि उसकी मांग 38,000 करोड़ रुपये की है।