यानी गौतम की फिल्म नई नवेली को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर प्रमोशन तक में खूब कसीदे पढ़े जा रहे हैं. फिल्म को स्त्री मॉडल पर गढ़ा गया है और इसे छोटे शहर की बड़ी कहानी के तौर पर पेश किया जा रहा है. लेकिन ये क्या? हॉरर मूवी नई नवेली का पहले दिन पहला शो देखने सिनेमाघर पहुंचा तो फिल्म की टीम ने तो निराश ही कर दिया. जैसे ही थिएटर में टिकट बुक करने लगा तो वहीं मौजूद स्टाफ ने बताया कि फिल्म के मॉर्निंग शो कैंसल कर दिए गए हैं. 9 बजे का शो था और इस बात का मैसेज फिल्म की टीम की तरफ से साढ़े आठ बजे आया. यानी बॉलीवुड की लेट लतीफी यहां भी कायम थी. ये सितारे सिर्फ इवेंट्स में ही लेट नहीं आते बल्कि फिल्म भी लेट कैंस करते हैं. कुल मिलाकर फिल्म का नाम तो नई नवेली रख लिया, लेकिन चक्कर वही पुराना चला दिया. अब हम बताते हैं वो दो वजहें जिसकी वजह से फिल्म के शो कैंसल हुए हों...
क्या मेकर्स नहीं चाहते 12 बजे से पहले आएं रिव्यू?
अमूमन ऐसा होता है कि फिल्म के मेकर्स फिल्म के शो दिखाते हैं और रिव्यूअर पर शर्त लगाते हैं कि एमबार्गो है. हमने आपको फिल्म दिखाई है तो आपको रिव्यू उसी समय करना होगा जिस समय की हम कट ऑफ दे रहे हैं. अब मैं तो हर हफ्ते रिव्यू करता हूं और प्रेस शो से बचता हूं क्योंकि फिल्म को लेकर अपनी राय किसी की बंदी क्यों बनाऊं. नई नवेली फिल्म गुरुवार को दिखा दी गई. प्रेस शो हो गया. लेकिन एक मैसेज आया कि एमबार्गो कल दोपहर 12 बजे तक का है. यानी हम दिखाएंगे फिल्म तो हम ही बताएंगे कब छापना है रिव्यू. तो शायद मेकर्स नहीं चाहते कि आम आदमी को फिल्म की रिपोर्ट उनके तय समय से पहले मिले.
दर्शक तो पहुंचे ही नहीं?
यामी गौतम की फिल्म है. इससे पहले धुरंधर 2 में उनकी एक झलक देखने को मिली थी. नई नवेली में यामी हॉरर और एक मिथकीय किरदार में नजर आ रही हैं. ट्रेलर से ही लग रहा था कि फिल्म हो सकता है स्त्री की तर्ज पर बनी हो. लेकिन अब आदतन जब नई नवेली का फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने पहुंचा तो सिनेमाहॉल में ही स्पॉट बुकिंग करने लगा.
9 बजे का शो पूरी तरह से खाली था. शायद एक या दो टिकट बुक दिखी. मैं टिकट बुक करवाने लगा तभी सिनेमाघर के स्टाफ ने बताया कि फिल्म की टीम की तरफ से मॉर्निंग शो कैंसल हो गए हैं. अब शो 12 बजे होगा. अब शो किसने कैंसल किया, क्यों किया अब इस बारे में तो मैं कुछ नहीं कह सकता. शो नोएडा के इसी सिनेमाघर में कैंसल हुए या पूरी इंडिया में कुछ पता नहीं. यहां सवाल ये पैदा होता है कि अगर मेकर्स को फिल्म को लेकर कॉन्फिडेंस नहीं है तो फिल्म बुकिंग साइट पर बेवजह का 9 बजे का टाइम देना किसी तरह की ठगी से कम नहीं.
अब मेरा तो ठहरा रिव्यू करने का काम मैं तो जाऊंगा. नहीं शो चलेगा तो बैरंग वापस आने में भी कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन उन दो लोगों को सोचिए जो टिकट बुक करवाकर कहीं से आए होंगे और उनको लौटना पड़ा होगा. यही नहीं, एक फैमिली भी फिल्म देखने के लिए आई थी, उसे भी निराश होकर लौटना पड़ा. अब प्रोड्यूसर फिल्म के मालिक हैं वो जब चाहें फिल्म दिखाएं जब चाहे नहीं. लेकिन दर्शकों के साथ इस तरह का व्यवहार कितना ठीक? आप हमें जरूर बताएं.