इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी' की खूब चर्चा हो रही है. राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक इस नाम को लेकर बहस छिड़ी हुई है. भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद यह चर्चा और तेज हो गई और देखते ही देखते लोग भी इस नाम से जुड़ने लगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘कॉकरोच' का बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन से भी एक दिलचस्प नाता रहा है? शायद नई पीढ़ी के बहुत से लोगों को यह बात मालूम न हो, लेकिन साल 1991 में रिलीज हुई अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म हम में ‘कॉकरोच' शब्द ने खूब लोकप्रियता हासिल की थी. यही वह फिल्म थी जिसका गाना जुम्मा चुम्मा दे दे आज भी लोगों की जुबान पर है. फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ गोविंदा, रजनीकांत और किमी काटकर भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे.
फिल्म का दृश्य
फिल्म में एक बेहद यादगार दृश्य था, जिसमें अमिताभ बच्चन शराब के नशे में अपने दोस्त गोंजाल्वेस को समझाने पहुंचते हैं कि बख्तावर जैसे खतरनाक लोगों से पंगा नहीं लेना चाहिए. लेकिन नशे की हालत में वह बार-बार अपनी बात भूल जाते हैं और एक ही बात दोहराते रहते हैं. यही दृश्य बाद में फिल्म का सबसे चर्चित कॉमिक सीन बन गया.
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अमिताभ बच्चन का संवाद
अमिताभ बच्चन का संवाद कुछ इस तरह था, “देखा गोंजाल्वेस, इस दुनिया में दो तरह के कीड़े होते हैं. एक वो जो कचरे से उठता है और दूसरा वो जो पाप की गंदगी से उठता है. कचरे वाला कीड़ा इंसान को बीमार कर देता है, मगर पाप की गंदगी का कीड़ा पूरे समाज को बीमार कर देता है. कचरे के कीड़े को मारने के लिए फ्लीट बाजार में मिलता है, मगर पाप के कीड़े को मारने वाला फ्लीट आज तक बना ही नहीं.”
इसके बाद अमिताभ के दोस्त बने रोमेश शर्मा फिर पूछते हैं कि टाइगर, तू मुझे क्या बताने आया था? तब अमिताभ बच्चन कहते हैं कि यह तो मैं भूल ही गया और फिर यही डायलॉग दोबारा एक सख्त अंदाज में दोहराते हैं. तीसरी बार जब गोंजाल्वेस उनसे वही सवाल पूछता है तो इस बार अमिताभ टूटी-फूटी अंग्रेजी में अपनी बात कहते हैं. यहीं पर वह नाली के कीड़ों के लिए ‘कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल करते हैं.
संवाद कुछ इस तरह था, “सी गोंजाल्वेस… आई टेल यू… दीस ब्लडी गुंडा लोग… देयर ब्लडी कॉकरोच फ्रॉम गटर. गटर कॉकरोच दे आर. यू पुट फ्लीट… एंड अपसाइड डाउन… डेड कॉकरोच. बट माय डियर फ्रेंड… दिस ब्लडी सोसाइटी कॉकरोच… नो फ्लीट, नो मार्केट, नथिंग… नो .”
कहानी का अहम मोड़
फिल्म में यह दृश्य कहानी के एक अहम मोड़ पर आता है, लेकिन इसे हल्के-फुल्के हास्य के साथ पेश किया गया था. अमिताभ बच्चन की टाइमिंग और उनके संवाद बोलने के अंदाज ने इस सीन को यादगार बना दिया. फिल्म रिलीज होने के बाद बच्चे-बच्चे की जुबान पर यह डायलॉग चढ़ गया था और लंबे समय तक लोग इसे दोहराते नजर आते थे.
आज भले ही ‘कॉकरोच' शब्द एक नए राजनीतिक संदर्भ में चर्चा में हो, लेकिन हिंदी सिनेमा के दर्शकों के लिए यह शब्द कोई नया नहीं है. करीब 35 साल पहले अमिताभ बच्चन की फिल्म हम इसे लोकप्रिय बना चुकी थी और उस दौर में भी ‘कॉकरोच' खूब चर्चा में रहा था.
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