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टॉक्सिक की कमजोर कड़ी आई सामने, डायरेक्टर ही निकली फिल्म की दुश्मन, यश ने दांव पर कैसे लगा डाले 500 करोड़

फिल्म की डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि वह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से पूरी तरह बंधकर काम करने में विश्वास नहीं रखतीं. उनका कहना था कि वह पहले कहानी लिखती हैं, लेकिन शूटिंग के दौरान फिल्म में बदलाव होते रहते हैं.

टॉक्सिक की कमजोर कड़ी आई सामने, डायरेक्टर ही निकली फिल्म की दुश्मन, यश ने दांव पर कैसे लगा डाले 500 करोड़
'टॉक्सिक’ की कमजोर कड़ी निकली डायरेक्टर! इंटरव्यू देखकर चौंके फैंस!
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केजीएफ के बाद यश ने करीब चार साल तक किसी फिल्म को सिनेमाघरों में नहीं उतारा. फिर 26 अगस्त को उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक रिलीज हुई, जिस पर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने की चर्चा है. लेकिन फिल्म के सामने आने के बाद सबसे ज्यादा सवाल इसकी कहानी और निर्देशन को लेकर उठ रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि टॉक्सिक शुरू होने से पहले ही इसकी डायरेक्टर गीतू मोहनदास अपने फिल्म बनाने के तरीके को लेकर ऐसा बयान दे चुकी थीं, जिसे अब फिल्म के नतीजे से जोड़कर देखा जा रहा है. गीतू ने कहा था कि वह लिखती कुछ हैं, शूट कुछ और करती हैं और एडिटिंग के बाद फिल्म कुछ और बन जाती है.

गीतू मोहनदास ने पहले ही बता दिया था अपना तरीका

टॉक्सिक की शूटिंग शुरू होने से पहले दिए एक इंटरव्यू में गीतू मोहनदास ने कहा था कि वह कभी भी स्क्रिप्ट से पूरी तरह बंधकर काम नहीं करतीं. उनके मुताबिक, वह पहले कुछ लिखती हैं, फिर शूटिंग के दौरान फिल्म बदल जाती है और एडिटिंग में उसका रूप फिर बदल जाता है. उन्होंने यहां तक कहा था कि जब वह अपनी अगली फिल्म के लिए प्रोड्यूसर्स से मिलती हैं तो उन्हें पहले ही बता देती हैं कि वे जो स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं, जरूरी नहीं कि आखिर में उन्हें वही फिल्म देखने को मिले. यानी गीतू के लिए स्क्रिप्ट अंतिम खाका नहीं, बल्कि फिल्म बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत भर होती है.

अब कहानी और निर्देशन पर ही उठे सवाल

26 अगस्त को रिलीज हुई टॉक्सिक के बाद फिल्म को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. फिल्म के बड़े स्तर, विजुअल्स और यश की मौजूदगी की चर्चा है, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर सवाल भी उठे हैं. यही वजह है कि गीतू मोहनदास का पुराना बयान अब फिर चर्चा में है. जिस डायरेक्टर ने खुद कहा था कि उसकी फिल्म शूटिंग और एडिटिंग के दौरान लगातार बदलती रहती है, उसकी टॉक्सिक में कहानी का कमजोर पड़ना लोगों को उस बयान से जोड़ने का मौका दे रहा है. टॉक्सिक की कहानी पर यश और गीतू मोहनदास दोनों ने काम किया है. लेकिन फिल्म को अंतिम रूप देने और उसे पर्दे तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बतौर डायरेक्टर गीतू के पास थी.

यश ने आखिर किस पर लगाया इतना बड़ा दांव?

केजीएफ के बाद यश से उम्मीदें बेहद ऊंची थीं. ऐसे में चार साल के इंतजार के बाद यश ने करीब 500 करोड़ रुपये की टॉक्सिक पर अपना बड़ा दांव खेला. लेकिन अब सवाल यही है कि क्या गीतू मोहनदास का स्क्रिप्ट से हटकर फिल्म को लगातार बदलने वाला तरीका इस बार फिल्म पर भारी पड़ गया?  गीतू मोहनदास का यही अंदाज उनकी रचनात्मक ताकत भी हो सकता है, लेकिन यश ने चार साल के इंतजार के बाद जिस फिल्म पर इतना बड़ा दांव लगाया, वहां सबसे ज्यादा सवाल फिल्म की कहानी को लेकर ही उठ रहे हैं.

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