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कभी स्कूल में सूरजमुखी बनता था ये एक्टर, ऐड कंपनी में करता था काम, आज है ओटीटी का जबरदस्त हीरो, ना पंकज, ना मनोज ना ही जयदीप अहलावत

बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें किसी एक तरह के किरदार में बांधना मुश्किल होता है. केके मेनन भी ऐसे ही अभिनेताओं में गिने जाते हैं. पर्दे पर उनका अंदाज बाकी कलाकारों से काफी अलग नजर आता है.

कभी स्कूल में सूरजमुखी बनता था ये एक्टर, ऐड कंपनी में करता था काम, आज है ओटीटी का जबरदस्त हीरो, ना पंकज, ना मनोज ना ही जयदीप अहलावत
कभी स्कूल में सूरजमुखी बनता था ये एक्टर, ऐड कंपनी में करता था काम
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बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें किसी एक तरह के किरदार में बांधना मुश्किल होता है. केके मेनन भी ऐसे ही अभिनेताओं में गिने जाते हैं. पर्दे पर उनका अंदाज बाकी कलाकारों से काफी अलग नजर आता है. चाहे गंभीर किरदार हो, नेगेटिव रोल हो या फिर कोई ऐसा चरित्र, जो उनके व्यक्तित्व से एकदम अलग हो, मेनन अपनी एक्टिंग से उसे यादगार बना देते हैं. फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने थिएटर, टीवी और ओटीटी पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है. 

सूरजमुखी किया रोल

क्या आप जानते हैं कि अभिनय की दुनिया से उनका रिश्ता बेहद छोटी उम्र में ही जुड़ गया था? महज नौ साल की उम्र में उन्होंने अपने स्कूल के एक नाटक में सूरजमुखी का किरदार निभाया था.

कहा जाता है कि यही उनका पहला ऑन-स्टेज अभिनय था. उस समय शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि स्कूल के मंच पर किया गया यह छोटा-सा किरदार आगे चलकर उनकी जिंदगी की दिशा बदल देगा. हालांकि इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और विज्ञापन की दुनिया में भी काम किया लेकिन अभिनय का जुनून उनके अंदर बना रहा.

केके मेनन का जन्म 2 अक्टूबर 1966 को केरल में हुआ था जबकि उनकी परवरिश महाराष्ट्र के पुणे में हुई. उनकी स्कूली पढ़ाई भी पुणे में हुई. इसके बाद उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से भौतिकी की पढ़ाई की और आगे एमबीए भी किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विज्ञापन उद्योग में काम करना शुरू किया.

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विज्ञापन का दुनिया छोड़ की एक्टिंग

नौकरी के बीच भी उनका मन अभिनय की तरफ खिंचता रहा. आखिरकार उन्होंने विज्ञापन की दुनिया से अलग होकर थिएटर का रास्ता चुना. यहीं से उनके अभिनय करियर की असली शुरुआत हुई. थिएटर ने उन्हें सिर्फ मंच नहीं दिया बल्कि अलग-अलग तरह के किरदारों को समझने और उन्हें जीने का मौका भी दिया.

केके मेनन के थिएटर सफर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ भी जुड़ा रहा. उन्होंने थिएटर में लंबे समय तक काम किया और मंच पर अभिनय की बारीकियां सीखीं. थिएटर की यही मजबूत नींव आगे चलकर फिल्मों में उनके अभिनय की पहचान बनी.

'नसीम' से बदला नसीब

केके मेनन ने साल 1995 में आई फिल्म 'नसीम' से फिल्मों में कदम रखा. हालांकि इसमें उनकी भूमिका छोटी थी, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें अलग तरह के किरदार मिलने लगे. साल 1999 की 'भोपाल एक्सप्रेस' में उनके अभिनय को पहचान मिली. इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जिनमें उनके अभिनय की खूब चर्चा हुई.

'हजारों ख्वाहिशें ऐसी', 'ब्लैक फ्राइडे', 'सरकार', 'कॉरपोरेट', 'लाइफ इन अ मेट्रो', 'गुलाल', 'हैदर' और 'द गाजी अटैक' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए.

समय के साथ सिनेमा का दायरा बदला तो केके मेनन ने भी खुद को नए माध्यम के मुताबिक ढाला. ओटीटी पर उनकी लोकप्रियता 'स्पेशल ऑप्स' से और बढ़ी. इसमें उन्होंने रॉ अधिकारी हिम्मत सिंह का किरदार निभाया. इस भूमिका को दर्शकों ने काफी पसंद किया और मेनन की गिनती ओटीटी के चर्चित अभिनेताओं में होने लगी. इसके बाद 'स्पेशल ऑप्स 1.5: द हिम्मत स्टोरी' में भी वह नजर आए. साल 2023 की वेब सीरीज 'फर्जी' में उन्होंने मंसूर दलाल का किरदार निभाया.

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