विज्ञापन
This Article is From Aug 27, 2025

90s का ये एक्टर दिन में फिल्मों के लिए छानता था खाक और रात में करता था होटल की नौकरी, कभी नहीं मिला स्टारडम

इस एक्टर की मां भी एक्ट्रेस बनना चाहती थी लेकिन उनका सपना पूरा नहीं हो पाया. हालांकि उन्होंने अपने बेटे के फिल्मी करियर को हमेशा सपोर्ट किया.

90s का ये एक्टर दिन में फिल्मों के लिए छानता था खाक और रात में करता था होटल की नौकरी, कभी नहीं मिला स्टारडम
दीपक तिजोरी कभी नहीं बन पाए लीड हीरो
Social Media
नई दिल्ली:

बॉलीवुड की दुनिया बाहर से देखने पर जितनी भी चमकदार दिखती है, अंदर से उतनी ही संघर्षों से भरी होती है. हर एक्टर और एक्ट्रेस की बॉलीवुड में कदम रखने की अपनी-अपनी वजह और कहानी है. कुछ कलाकार इन कहानियों को कभी दुनिया के सामने नहीं लाते तो कुछ वक्त के साथ खुलकर बताते हैं कि उन्होंने फिल्मों में आने का सफर कैसे तय किया. एक्टर दीपक तिजोरी ऐसे ही कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने ज्यादातर फिल्मों में भले ही मुख्य किरदार न निभाया हो, लेकिन असल जिंदगी में उनके संघर्ष की कहानी किसी नायक से कम नहीं रही. फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए दीपक तिजोरी दिन में प्रोड्यूसर्स के दफ्तरों के चक्कर लगाते थे और रात को होटल में काम करते थे. 

एक्ट्रेस बनना चाहती थी मां, बेटे के जरिए पूरा किया सपना

दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था. उनका परिवार मूल रूप से गुजरात के मेहसाणा से था. उनके परदादा तिजोरियां बनाने का काम करते थे इसी वजह से दीपक का सरनेम 'तिजोरीवाला' पड़ गया, जो वक्त के साथ 'तिजोरी' हो गया. दीपक तिजोरी के पिता गुजराती वैष्णव और मां पारसी ईरानी थीं. मां को फिल्मों में काम करने का शौक था, लेकिन परिवार के रूढ़िवादी होने की वजह से उनका सपना अधूरा रह गया. हालांकि उन्होंने अपने बेटे दीपक को अभिनय की दुनिया में जाने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया.

कॉलेज में हमेशा बने हीरो

दीपक की पढ़ाई मुंबई के नरसी मोनजी कॉलेज से हुई, जहां से उन्हें अभिनय में गहरी रुचि जगी. कॉलेज के दिनों में उन्होंने थिएटर ग्रुप ज्वाइन किया और यहीं उनकी मुलाकात आमिर खान, आशुतोष गोवारिकर, परेश रावल जैसे कई कलाकारों से हुई, जो आगे चलकर बड़े नाम बने. कॉलेज में दीपक हर प्ले में हीरो का रोल निभाते थे और उन्हें भरोसा हो चला था कि कॉलेज से निकलते ही उन्हें फिल्मों में भी हीरो बनने का मौका मिल जाएगा, लेकिन असल दुनिया में कदम रखते ही उनकी इस सोच को झटका लगा.

दिन में ढूंढते थे फिल्मों में काम रात को होटल में नौकरी

कॉलेज खत्म होते ही जब दीपक ने फिल्मों में काम खोजना शुरू किया तो उन्हें समझ आ गया कि यहां बिना किसी पहचान के आगे बढ़ना आसान नहीं है. घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी. पिता की आमदनी सीमित थी और बड़े भाई के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी थी. ऐसे में दीपक ने रात में बांद्रा के होटल में फ्रंट डेस्क पर काम शुरू कर दिया, ताकि दिन में वह फिल्म स्टूडियो और प्रोड्यूसर्स के दफ्तर जा सकें. यह उनके जीवन का सबसे कठिन और उन्हें सबसे मजबूत बनाने वाला समय था. दिनभर संघर्ष और रातभर काम, कुछ इस तरह उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा.

पहली फिल्म में मिला दोस्त का रोल

धीरे-धीरे दीपक को छोटे-मोटे मॉडलिंग असाइनमेंट मिलने लगे और फिर एक दिन उन्हें अभिनेता अवतार गिल का फोन आया. उन्होंने बताया कि महेश भट्ट उन्हें ढूंढ रहे हैं. दीपक ने तुरंत उनसे संपर्क किया और तब जाकर उन्हें फिल्म 'आशिकी' में एक दोस्त का किरदार मिला. यह रोल छोटा जरूर था, लेकिन असरदार इतना था कि इसके बाद दीपक को एक के बाद एक फिल्में मिलती गईं. 'सड़क', 'दिल है कि मानता नहीं', 'खिलाड़ी', 'जो जीता वही सिकंदर', 'कभी हां कभी ना', और 'अंजाम' जैसी सुपरहिट फिल्मों में बतौर को-एक्टर काम किया. इन फिल्मों में उनकी भूमिकाओं को आज भी याद किया जाता है.

फिल्मों में लगातार दोस्त या साइड रोल करने के बाद दीपक तिजोरी को अगस्त 1993 में रिलीज हुई फिल्म 'पहला नशा' में बतौर लीड एक्टर काम मिला. फिल्म में शाहरुख खान और आमिर खान जैसे नाम भी गेस्ट अपीयरेंस में थे. अच्छी स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. इसी के साथ दीपक की मुख्य अभिनेता बनने की ख्वाहिश धुंधली पड़ गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अभिनय से हटकर उन्होंने फिल्म निर्देशन में भी किस्मत आजमाई.

डायरेक्टर बनने की कोशिश रही फेल

साल 2003 में दीपक ने फिल्म 'ऑप्स' के साथ डायरेक्टर बनने की शुरुआत की. हालांकि फिल्म को उसके बोल्ड कंटेंट की वजह से काफी आलोचना झेलनी पड़ी. फिल्म को गलत ढंग से प्रचारित किया गया और उसे एक एडल्ट फिल्म का टैग दे दिया गया, जबकि दीपक के अनुसार यह एक इमोशनल स्टोरी थी. बाद में उन्होंने 'टॉम डिक एंड हैरी', 'खामोशी: खौफ की एक रात', और 'फॉक्स' जैसी फिल्में डायरेक्ट कीं, लेकिन ये भी कमर्शियल रूप से कुछ खास नहीं कर पाईं.

टीवी इंडस्ट्री में भी दीपक ने हाथ आजमाया और 'सैटरडे सस्पेंस', 'थ्रिलर एट 10 फरेब', और 'डायल 100' जैसे शो प्रोड्यूस किए. ये शो अवॉर्ड विनिंग रहे, लेकिन जब टीवी पर सास-बहू का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने खुद को वहां से अलग कर लिया. दीपक ने दोबारा कैमरे के सामने लौटने का फैसला किया. उन्होंने 'इत्तर' जैसी फिल्मों में मिडिल एज प्रेमी की भूमिका निभाई. हालांकि उन्हें कोई बड़ा अवॉर्ड नहीं मिला, लेकिन उनका संघर्ष और अभिनय आज भी सिनेप्रेमियों को प्रेरित करता है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Deepak Tijori, Deepak Tijori Birthday, Deepak Tijori Birthday Special Story, Deepak Tijori Birthday Special Story News, Deepak Tijori Films, Deepak Tijori Hard Work, Deepak Tijori Struggle Story, Deepak Tijori Age, Deepak Tijori Movies, Deepak Tijori News, Deepak Tijori Wife, Deepak Tijori Controversies
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com