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61 साल पुराना ये गाना रक्षाबंधन पर आज भी कर देता है आंखें नम, आशा भोसले की आवाज और साहिर के बोल ने रचा इतिहास

भाई-बहन का प्यार अटूट होता है और बिना किसी स्वार्थ के रहता है. भाई-बहन के इस प्यार को 61 साल पुराने इस गाने में साफ तौर पर समझा जा सकता है. इस गाने को सुनते ही भाई और बहनों की आंखें नम हो जाती हैं. आइए जानते हैं कौन सा है वो कालजयी गीत.

61 साल पुराना ये गाना रक्षाबंधन पर आज भी कर देता है आंखें नम, आशा भोसले की आवाज और साहिर के बोल ने रचा इतिहास
61 साल पहले अपने भाई के लिए गाया था बहन ने ये गाना, आज भी आंखें कर देता है नम
नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में हर मौके के लिए गाने होते हैं. अब जब रक्षाबंधन का त्योहार आ रहा है तो इस भाई-बहन के रिश्ते की मिठास को और गहरा कर देते हैं बॉलीवुड के कुछ गानें, जो सालों बाद भी रक्षाबंधन की प्लेलिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए हैं. अगर कहा जाए तो बॉलीवुड ने भी इस रिश्ते को कई खूबसूरत गानों के जरिए यादगार बनाया है. आज भी बहनें अपने भाई को राखी बांधते हुए ये गाना जरूर गुनगुनाती हैं. आज हम बात कर रहे हैं 61 साल पहले आए भाई-बहन के एक गाने को जिसको राखी बांधते हुए लोग आज भी गाते हैं. हर बहन, अपने भाई के लिए ये गाना डेडिकेट करती है. इस गाने के बोल ऐसे हैं जो सीधे दिल को छूते हैं. यही वजह है कि 61 
साल बाद भी लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए है.

कौन सा है भाई-बहन का गाना 

साल 1965 में आई फिल्म 'काजल' का एक ऐसा ही गाना है जो आज भी यानि 61 साल बाद भी राखी के मौके पर खूब सुना जाता है. गाने के बोल हैं "मेरे भैया मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन". इस गाने के बोल इतने प्यारे हैं कि इसकी हर एक लाइन से भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरती और बहन का प्यार झलक रहा है. गाने में मीना कुमारी अपने भाई शैलेश कुमार के लिए गाना गा रही हैं. वो अपने भाई को चांद और अनमोल रतन कहती हैं. वो साफ कहती हैं कि उनको अपने भाई के बदले और कोई चीज नहीं चाहिए. ये सिर्फ एक गाना नहीं है बल्कि भाई-बहन के प्यार की आवाज भी बन गया है. 

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आशा भोसले की आवाज का जादू

फिल्म काजल का गाना 'मेरे भैया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन' गाने के बोल मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. उनके बोल सरल और दिल को छू लेने वाले थे. इस गाने को संगीत दिया था रवि ने और इस गाने को अपनी खूबसूरत आवाज से आशा भोसले ने इस गाने को अमर बना दिया. गाने की सबसे खास बात इसके बोल हैं, जिनमें एक बहन अपने भाई के लिए अपने दिल की बात कहती है. यही वजह है कि ये गाना सिर्फ एक फिल्म का गीत नहीं रहा है, बल्कि रक्षाबंधन के मौके पर अपने भाई के लिए प्यार की आवाज बन गया है. गाने के बोल, संगीत और आशा जी की आवाज इन तीनों चीजों के मिलते है पुराने दौर की यादें ताजा हो जाती हैं.  इसकी धुन में आज के गानों जैसी तेज आवाज या शोर नहीं, बल्कि एक सुकून है, जो सीधे दिल तक पहुंचता है.

61 साल बाद भी क्यों खास है ये गाना?

आज के समय पर जो भाई-बहन एक दूसरे से दूर होते हैं वो सोशल मीडिया पर मैसेज और वीडियोज शेयर करते हुए, अलग-अलग अंदाज में अपना प्यार जाहिर करते हैं. लेकिन 'मेरे भैया मेरे चंदा' जैसे पुराने गाने उस रिश्ते की एक ऐसी सादगी याद दिलाते हैं, जो वक्त के साथ भी पुरानी नहीं होती. 1965 में रिलीज हुआ ये दाना 61 साल बाद भी रक्षाबंधन की प्लेलिस्ट का हिस्सा बना हुआ है. शायद यही पुराने हिंदी सिनेमा के गानों की सबसे बड़ी खूबी है. दशक बदल जाते हैं, लेकिन उनके एहसास नहीं बदलते.
 

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