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56 साल पुराना वो गाना जिसका हीरो भी मर गया, हीरोइन भी मर गई, इश्क में खाई ऐसी ठोकर, लता मंगेशकर की आवाज में यह गाना आशिकों की दिलों की पुकार

1970 में रिलीज हुई क्लासिक फिल्म 'हीर रांझा' फिल्म का फेमस रोमांटिक गीत जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से अमर बना दिया. 56 साल बाद भी आज ये गाना लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल है. आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा सदाबहार गानों में से एक है.

56 साल पुराना वो गाना जिसका हीरो भी मर गया, हीरोइन भी मर गई, इश्क में खाई ऐसी ठोकर, लता मंगेशकर की आवाज में यह गाना आशिकों की दिलों की पुकार
लता मंगेशकर की आवाज ने 56 साल बाद भी जिंदा रखा है इस गाने का जादू
नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में बात जब भी पुराने गानों की होती है तो वो सीधे दिल तक उतर जाते हैं. 90 के दशक के गाने सिर्फ सुने नहीं जाते, बल्कि ये महसूस किए जाते हैं. इनके बोल और संगीत ऐसा जो सालों बाद भी लोगों के जहन में यादगार बना रहता है. इस गाने की खासियत सिर्फ इसका संगीत नहीं बल्कि इसके बोल हैं जिसमें प्यार में पड़ने की खुशी, झिझक और बेचैनी को दिखाती है. आज हम बात कर रहे हैं 1970 में आई फिल्म हीर-रांझा के गाने की, जो सालों बाद भी आशिकों की पसंद बना हुआ है. 

कौन सा है गाना

1970 में आई फिल्म हीर-रांझा में राजकुमार और प्रिया राजवंशी की जोड़ी नजर आई थी. इसका गाना 'मिलो ना तुम तो हम घबराएं, मिलो तो आंख चुराएं' गाना है जो सालों बाद भी बजता है तो लोग उस दौर मे चले जाते हैं. इस गाने को पंजाब के खेतों में फिल्माया गया था. राजकुमार और प्रिया राजवंशी की केमिस्ट्री ने लोगों का दिल जीत लिया था. इस गाने को सुनते ही पुराने दौर की मोहब्बत आंखों के सामने आ जाती है. 56 साल बाद भी ये गाना लोगों के बीच उतना ही पसंद किया जाता है. 

इस फेमस गाने में अभिनय करने वाले राजकुमार और प्रिया राजवंशी आज हमारे बीच नहीं हैं. राज कुमार का निधन 1996 में हो गया था, जबकि प्रिया राजवंश का निधन 2000 में हुआ था. लेकिन उनकी फिल्म और खासकर यह गाना आज भी दोनों की याद दिलाता है.

लता की आवाज और मदन मोहन की जादुई धुन

इस गाने के बोल फेमस शायर और लेखक कैफी आजमी ने लिखे थे और इसे संगीत दिया था मदन मोहन ने. इस गाने को लता मंगेशकर जी ने अपनी खूबसूरत आवाज से सजाया था. इस गाने की खासियत है इसमें प्यार का वो दौर दिखता है जब अपने इश्क का इजहार लोग खुलकर नहीं करते थे. जब सामने वाला पास आता था तो दिल घबराता था, लेकिन दूर जाने पर इसकी कमी महसूस होती है. इस गाने में इश्क में पड़े इंसान के दिल की उलझन समझ आती है, जिसे लोग आज के समय में भी आसानी से समझ सकते हैं. 

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क्या है फिल्म 'हीर रांझा' की कहानी 

फिल्म हीर रांझा का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था, जिसमें राज कुमार ने रांझा और प्रिया राजवंश ने हीर का किरदार निभाया था. फिल्म की एक और खास बात थी इसके डॉयलाग जिसे कैफी आजमी ने कविता के अंदाज में ही लिखे थे. फिल्म में मदन मोहन के संगीत और कैफी आजमी के बोलों ने मिलकर कहानी को एक अलग ही रंग दे दिया था. इसमें हीर एक बेहद खूबसूरत और अमीर घराने की लड़की होती हैं, जबकि रांझा यानि राजकुमार तख्त हजारा का लड़का है. दोनों के परिवार के बीच पुरानी दुश्मनी होती है. अपने प्यार के लिए संघर्ष और फिर दोनों की दुखद मौत के साथ कहानी का अंत होता है. 

'मिलो ना तुम तो हम घबराएं, मिलो तो आंख चुराए' इस फिल्म के यादगार गानों में से एक है. वक्त बीता, कलाकार चले गए, लेकिन लता दीदी की आवाज में ये गाना आज भी लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए है. 

गाने के बोल

मिलो न तुम तो हम घबराये
मिलो तो आँख चुराये
हमें क्या हो गया है
तुम्हीं को दिल का राज़ बतायें
तुम्हीं से राज़ छुपायें
हमें क्या हो गया है 

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